तनाव, गलत खान-पान और भागदौड़ भरी दिनचर्या के बीच आयुर्वेद की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है
मुजफ्फरपुर: आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने उपचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन इसके बावजूद आयुर्वेद की प्रासंगिकता आज भी बरकरार है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और असंतुलित खान-पान के कारण लोगों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में आयुर्वेद न केवल रोगों के उपचार, बल्कि उनसे बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आ रहा है।
जनक आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के वैद्य ललन तिवारी बताते हैं कि आयुर्वेद का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं है, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित कर व्यक्ति को पूर्ण रूप से स्वस्थ बनाना है। आयुर्वेद व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार जीवनशैली, खान-पान और दिनचर्या अपनाने की सलाह देता है, जिससे शरीर लंबे समय तक स्वस्थ बना रहता है।
उन्होंने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत भोजन, अनियमित दिनचर्या और मानसिक तनाव के कारण डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। आयुर्वेद इन रोगों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार और प्राकृतिक औषधियों के माध्यम से शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाया जा सकता है, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
डॉ. तिवारी के अनुसार आयुर्वेदिक उपचार में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और औषधियों का उपयोग किया जाता है। इनके प्रयोग से सामान्यतः रासायनिक दवाओं की तरह दुष्प्रभाव की आशंका कम रहती है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग अब प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष जोर देता है। जब शरीर की अंदरूनी शक्ति मजबूत होती है तो व्यक्ति संक्रमण और अन्य बीमारियों से बेहतर तरीके से मुकाबला कर पाता है। इसके साथ ही आयुर्वेद में शरीर की प्राकृतिक शुद्धि पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से शरीर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालकर उसे संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
डॉ. तिवारी का कहना है कि आयुर्वेद केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी समान महत्व देता है। योग, ध्यान और नियमित दिनचर्या को जीवन का हिस्सा बनाने से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और एकाग्रता में वृद्धि होती है। उनका मानना है कि यदि आधुनिक जीवनशैली के साथ आयुर्वेद के सिद्धांतों को अपनाया जाए तो स्वस्थ, संतुलित और दीर्घायु जीवन की दिशा में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।