स्वास्थ्य विभाग ने बदली स्वीकृति प्रक्रिया, अब नियुक्ति प्राधिकार स्तर पर होगा अवकाश मंजूर
स्टेट डेस्क, बिहार
बिहार सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत स्टाफ नर्सों के मातृत्व अवकाश को लेकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया है। लंबे समय से अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों और फाइलों के अटकने की शिकायतों के बीच सरकार ने अब व्यवस्था में संशोधन करते हुए बड़ा निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने मातृत्व अवकाश स्वीकृति की शक्ति फिर से नियुक्ति प्राधिकार को सौंप दी है। इस संबंध में विभाग की ओर से नया आदेश भी जारी कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पहले लागू की गई नई व्यवस्था में कई तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं सामने आ रही थीं। इसके कारण मातृत्व अवकाश से जुड़े मामलों के निपटारे में देरी हो रही थी। इसी को देखते हुए सरकार ने पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने का निर्णय लिया है।
दरअसल दिसंबर 2025 में स्वास्थ्य विभाग ने मातृत्व अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया में बदलाव किया था। उस समय जिलों में सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को यह अधिकार दिया गया था। वहीं मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में अधीक्षक और अतिविशिष्ट अस्पतालों में निदेशक को मातृत्व अवकाश स्वीकृत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
हालांकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई स्तरों पर तकनीकी अड़चनें और प्रशासनिक समस्याएं सामने आने लगीं। कई मामलों में फाइलों के लंबित रहने और अवकाश मंजूरी में देरी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इससे महिला कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
निदेशक प्रमुख नर्सिंग रेखा झा की ओर से जारी नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में जारी आदेश को समाप्त करते हुए अब मातृत्व अवकाश स्वीकृति की शक्ति फिर से नियुक्ति प्राधिकार को दी जाती है। इसके बाद अब स्टाफ नर्सों के अवकाश से जुड़े मामलों का निपटारा उसी स्तर पर किया जाएगा जहां उनकी नियुक्ति से संबंधित प्रशासनिक अधिकार मौजूद हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया अधिक सरल और तेज होगी। साथ ही फाइलों के अनावश्यक लंबित रहने की समस्या में भी कमी आएगी। विभाग को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से महिला कर्मियों को समय पर लाभ मिल सकेगा और प्रशासनिक प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनेगी।
सरकार के इस फैसले को स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत महिला कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर स्टाफ नर्सों के बीच इस निर्णय को लेकर राहत और संतोष का माहौल देखा जा रहा है।
