गणेश धर द्विवेदी

नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया के तत्वावधान में शुक्रवार को गांधी-शास्त्री जयंती समारोह आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. संतोष यादव, अध्यक्ष हिंदी विभाग, रामजी सहाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रुद्रपुर ने कहा कि दो हजार वर्षों के इतिहास में गांधी ऐसी विभूति रहे, जिन्हें जनता ने अपार प्रेम दिया। उनके व्यक्तित्व में बुद्ध की करुणा, कबीर की निडरता और विवेकानंद का अध्यात्म दिखाई देता है। गांधी ने देश का भ्रमण कर गरीबी, छुआछूत और सांप्रदायिकता जैसी समस्याओं को समझा और फिर अपने सिद्धांतों को व्यवहार में उतारा।

बीज वक्तव्य में पूर्व प्राचार्य डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी ने कहा कि 1850 से 1950 के बीच की शताब्दी में गांधी, विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और टालस्टाय जैसी महान विभूतियों ने दुनिया को नई दिशा दी। विरोध के बावजूद गांधी आत्मबल और दृढ़ विश्वास के साथ अपने मार्ग पर कायम रहे। आज सिद्धांत, व्यावहारिक जीवन और राजनीति में सत्य के संदर्भ में गांधी का अध्ययन प्रासंगिक है।

संचालन करते हुए ऋषिकेश मिश्र ने कहा कि आज विश्व बारूद के मुहाने पर खड़ा है। ऐसे समय में गांधी की अहिंसा मानवता को बचाने का मार्ग दिखाती है। समारोह के संयोजक सरोज कुमार पांडेय ने कहा कि गांधी की चर्चा भारत ही नहीं, पूरे विश्व की चर्चा है। अध्यक्ष इंद्र कुमार दीक्षित ने कहा कि गांधी ने केवल बातें नहीं कीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारकर दिखाया।

इस दौरान अंजलि अरोड़ा खुशबू ने वाणी वंदना प्रस्तुत की। रंधा यादव और रेनू गुप्ता ने गांधी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति दी। संयुक्त मंत्री ब्रजेश पांडेय अधिवक्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ. मधुसूदन मिश्र, रवि प्रकाश मिश्र, चतुरानन ओझा, योगेंद्र पांडेय, गोपाल कृष्ण सिंह रामू, दिनेश कुमार त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।