युवक ने एक सितंबर को थाने में आवेदन देकर जान के खतरे की जताया था आशंका, पुलिस पर कैजुअल एप्रोच का आरोप

गणेश धर द्विवेदी                                                    

यूपी के जनपद देवरिया में एक युवक की हत्या के बाद बवाल की खबर सामने आई है। खबर यह है कि जनपद के भलुअनी कस्बे के वार्ड नंबर-13 गांधी नगर निवासी 23 वर्षीय युवक मनीष सिंह की हत्या कर दी गई है। इस खबर के बाद इलाके में कोहराम मच गया, लोग सड़क पर उतर गए। खबर यह भी आ रही है कि पोस्टमार्टम के बाद युवक का शव लेकर परिजन जब अंतिम संस्कार को निकले तो देवरिया-बरहज मार्ग जाम कर लोग प्रदर्शन करने लगे। बताया यह जा रहा है कि लोग इस हत्याकांड की जांच और मुआवजे के तौर पर एक करोड़ रुपए व परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी की मांग कर रहे थे। पुलिस और प्रशासन किसी तरह बिगड़े माहौल को काबू करने की कोशिश में जुटी रही। पुलिस हत्या की वजह आपसी विवाद बता रही है, लेकिन दूसरी तरफ युवक की हत्या के बाद जब लोग सड़क उतरे तो लोगों का गुस्सा सीधा पुलिस पर था। लोगों का कहना था कि जब युवक ने एक सितंबर को थाने में आवेदन देकर जान के खतरे की आशंका जताया था, तब पुलिस ने इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की। जबकि युवक ने अपने दिए गए आवेदन में स्पष्ट तौर पर नाम के साथ इस बात का उल्लेख किया था कि उसके जान को खतरा है। यदि युवक के आवेदन और उसके आधार पर लोगों के आरोप को देखा जाए तो सहसा यही सवाल उठता है कि आम आदमी की सुरक्षा को लेकर तत्पर पुलिस यदि फौरी तौर एक्शन में आई होती तो शायद युवक की जान बचाई जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, अब सवाल उठता है कि पुलिस क्यों कैजुअल एप्रोच में आ गई…?, पुलिस ने कोई एक्शन क्यों नहीं लिया…?, यह तो जांच का विषय है।

बताया जा रहा है कि युवक मनीष सिंह मौत चाकू लगने से हुई। बताया गया कि गुरुवार को दोस्तों के साथ बाहर गए मनीष के घायल होने की सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे। इसके बाद उसका भाई उसे मेडिकल कॉलेज देवरिया लेकर गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और इलाके में हड़कंप मच गया। इसके बाद जो हुआ उसका उल्लेख करने की जरुरत नहीं है।

क्षेत्राधिकारी बरहज रंजना सचान के अनुसार, मनीष गुरुवार को अपने कुछ मित्रों के साथ बाहर गया था। कस्बे के बाहर आपसी विवाद में उसके घायल होने की सूचना परिजनों को मिली थी। भाई उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज देवरिया लेकर पहुंचा, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया और पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सुपुर्द कर दिया।

परिजन और लोगों का आरोप है कि मनीष ने जब एक सितंबर को भलुअनी थाने में तहरीर देकर अपनी जान को खतरा बता पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी तब समय रहते पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की, यदि पुलिस ने कार्रवाई की होती तो यह घटना नहीं घटती।

उधर, देवरिया सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने अपने फेसबुक वॉल पर अपने पोस्ट में लिखा हैदेवरिया के भलुअनी में चरमपंथी चाइना अंसारी के हाथों हिंदू युवा साथी श्री मनीष सिंह सैंथवार उर्फ मोनू सिंह की बेरहमी से हुई हत्या अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुखद है, स्थानीय पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर हर किसी में क्षोभ है, समय रहते सूचना दिए जाने के बावजूद जिहादी चाइना अंसारी ने इस घटना को अंजाम दिया, यह पुलिसकर्मियों के नकारेपन का परिणाम है, हम सभी पीड़ित परिवार के साथ हैं, घटना से शासन को अवगत करा दिया गया है, डीजीपी, एडीजी ला एंड आर्डर और एस.पी. देवरिया से बात करके कड़ी कार्रवाई के लिए कहा है, हत्यारे को अपना अंजाम भुगतना होगा, साथ ही पुलिस कर्मियों की भी जवाबदेही भी तय की जाएगी। अब आगे क्या होगा यह तो समय ही बताएगा, लेकिन इस घटना के बाद जनपद की भलुअनी पुलिस की वक्रिंग को लोगों ने कटघरे में खड़ा कर दिया है। कि