- सरकार के दावों और जमीनी हालात में दिख रहा फर्क। स्थानीय लोगों ने बड़े तस्करों पर कार्रवाई नहीं करने का लगाया आरोप
पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे बड़े अभियानों और सरकारी दावों के बीच अब कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। राज्य सरकार लगातार “वॉर ऑन ड्रग्स” अभियान के जरिए नशे के कारोबार को खत्म करने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी चिंताजनक बताए जा रहे हैं। अलग-अलग सूत्रों और स्थानीय लोगों का कहना है कि तमाम कार्रवाई और केस दर्ज होने के बावजूद ड्रग तस्करी पूरी तरह रुकती नजर नहीं आ रही।
लोगों का कहना है कि शहरों और कस्बों की सड़कों पर अब भी नशे के आदी युवाओं के समूह आसानी से देखे जा सकते हैं। यही कारण है कि सरकार के अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा इस बात की भी है कि यदि लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां हो रही हैं, तो फिर नशे की सप्लाई चेन आखिर टूट क्यों नहीं रही।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल बार-बार उठाया जा रहा है कि ड्रग तस्करी का नेटवर्क आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि नशे की खेप कहां से आती है, कौन इसे शहरों और गांवों तक पहुंचाता है और किन लोगों के सहयोग से यह कारोबार लगातार जारी है। कई लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन बड़े तस्करों तक अब भी कानून का शिकंजा पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा।
सूत्रों का कहना है कि कई इलाकों में खुलेआम नशे की बिक्री होने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इसके बावजूद हालात में बड़ा बदलाव महसूस नहीं किया जा रहा। कुछ लोगों का आरोप है कि कई मामलों में कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रह जाती है और बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की गंभीर कोशिश दिखाई नहीं देती।
इसी बीच प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि निगरानी और जवाबदेही मजबूत हो, तो नशे के कारोबार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। कई सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि केवल अभियान चलाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि इसके लिए ईमानदार और निरंतर कार्रवाई जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी बन चुकी है। युवाओं को रोजगार, शिक्षा और सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराए बिना इस लड़ाई को पूरी तरह जीतना आसान नहीं होगा।
लोगों की मांग है कि सरकार को न केवल ड्रग तस्करों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि उन तंत्रों की भी निगरानी करनी चाहिए जो इस कारोबार को बढ़ावा देने या बचाने में भूमिका निभाते हैं। आम जनता का कहना है कि यदि सच में पंजाब को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालना है, तो केवल नारों से नहीं बल्कि पारदर्शी और कठोर कार्रवाई से भरोसा पैदा करना होगा।

