शुरुआती पड़ताल में विदेशी फंडिंग, फर्जी पहचान पत्र और अवैध पुनर्वास से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने गुरुवार को कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल), बल्लभगढ़ (फरीदाबाद), देवबंद (सहारनपुर), दिल्ली तथा अन्य स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की कथित अवैध घुसपैठ से जुड़े मामले में की गई।

जांच एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण और विभिन्न दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इसके अलावा मामले से जुड़े प्रमुख लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। ईडी का कहना है कि शुरुआती जांच में ऐसे संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते अवैध रूप से लोगों को भारत लाने और यहां बसाने में सक्रिय था।

ईडी के मुताबिक, यह नेटवर्क कथित तौर पर अवैध रूप से आए लोगों के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार कराने में भी मदद करता था। जांच एजेंसी का दावा है कि इन दस्तावेजों के जरिए उनकी पहचान बदलने और उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जाती थी।

जांच के दौरान एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की भूमिका भी सामने आई है, जो विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत बताया गया है। ईडी के अनुसार, इस ट्रस्ट को ब्रिटेन स्थित संस्थाओं से धनराशि प्राप्त होती थी। बाद में यह राशि 6 हजार, 8 हजार, 10 हजार रुपये जैसी छोटी-छोटी किश्तों में संदिग्ध व्यक्तियों तक पहुंचाई जाती थी। एजेंसी का दावा है कि इन पैसों का उपयोग अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों के आर्थिक पुनर्वास और उन्हें स्थायी रूप से बसाने में किया जाता था।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में एक गिरोह कथित तौर पर अवैध घुसपैठ कराने का काम करता था। इसके बाद दूसरा नेटवर्क उनके लिए जरूरी दस्तावेज तैयार करता था और फिर उन्हें रोजगार या अन्य कारणों से देश के अलग-अलग हिस्सों में भेज दिया जाता था। जांच एजेंसी के अनुसार, उनके लिए आय का स्थायी साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ई-रिक्शा, रोजगार या नकद आर्थिक सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी कराई जाती थीं।

फिलहाल ईडी पूरे मामले में वित्तीय लेनदेन, विदेशी फंडिंग और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।