महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के 75वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विद्यार्थियों को दिया संदेश।
वड़ोदरा : डिग्री केवल बेहतर करियर और अच्छी आय का रास्ता न बने, बल्कि उसका लाभ देश और समाज तक भी पहुंचे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को वड़ोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के 75वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को यही संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उससे लोगों का जीवन बेहतर हो और राष्ट्र की प्रगति में योगदान मिले।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 75 वर्षों से विश्वविद्यालय ज्ञान की विभिन्न धाराओं को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। आज बड़ी समस्याओं का समाधान किसी एक विषय के अध्ययन से संभव नहीं है। इसके लिए वैज्ञानिक की जिज्ञासा, कलाकार की संवेदना, इतिहासकार की दृष्टि, अर्थशास्त्री की समझ और समाजशास्त्री की चेतना को साथ लेकर चलने वाला बहुविषयक दृष्टिकोण जरूरी है। उच्च शिक्षण संस्थानों को इस दिशा में लगातार आगे बढ़ना चाहिए।
उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से राष्ट्रपति ने अपनी शिक्षा और ज्ञान के उद्देश्य पर विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि कार्यक्षेत्र में राष्ट्र और समाज के हित को सर्वोपरि रखकर आगे बढ़ने से देश और समाज के साथ व्यक्ति की भी प्रगति होगी और उसे संतोष मिलेगा।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों के अलग-अलग कार्यक्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इंजीनियर ऐसी तकनीक विकसित करें, जिससे लोगों का जीवन बेहतर हो। चिकित्सक चिकित्सा को केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा मानें और वैज्ञानिक मानवता की समस्याओं का समाधान खोजें।
कलाकार और साहित्यकार समाज की संवेदनशीलता को समृद्ध करें, जबकि उद्यमी केवल धन अर्जित करने तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार और अवसर भी पैदा करें। शिक्षक ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करें, जो विरासत और विकास को साथ लेकर चले। सार्वजनिक जीवन में जाने वाले युवा पद को अधिकार नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व समझें।
उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसा देश बनाना है, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सभी तक पहुंचें, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मानव कल्याण का माध्यम बनें तथा अवसरों में समानता हो। महिलाओं और युवाओं की पूरी क्षमता का उपयोग हो और प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।
राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत के इन लक्ष्यों को हासिल करने में विश्वविद्यालयों और युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शिक्षा से प्राप्त ज्ञान जब समाज की समस्याओं के समाधान और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनेगा, तभी उसकी वास्तविक उपयोगिता सामने आएगी।
