दोनों देशों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं


अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव थमता नजर नहीं आ रहा है। अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला करने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के 10 ठिकानों को निशाना बनाया, जहां मिसाइलें, ड्रोन और तटीय रडार प्रणाली से जुड़ा सैन्य ढांचा मौजूद था। ट्रंप के अनुसार यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि ईरान ने युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया।

ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका ने हालात को नियंत्रित करने और तनाव कम करने की पूरी कोशिश की है, लेकिन यदि स्थिति नहीं सुधरी तो सैन्य कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो ईरान को बेहद गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने यहां तक कहा कि एक समय ऐसा भी आ सकता है जब बातचीत का रास्ता समाप्त हो जाएगा और अमेरिका को सैन्य ताकत का इस्तेमाल करना पड़ेगा। उनके मुताबिक ऐसी स्थिति में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि ईरानी ड्रोन ने पनामा के झंडे वाले एक वाणिज्यिक टैंकर को निशाना बनाया। इसके बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। कमांड का कहना है कि ईरान को युद्धविराम समझौते का सम्मान करने का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। अमेरिका के अनुसार यह कार्रवाई व्यावसायिक जहाजों पर लगातार किए जा रहे हमलों के सीधे जवाब में की गई। इस दौरान ईरानी सैन्य निगरानी प्रणाली, संचार नेटवर्क, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन भंडारण केंद्र और समुद्री बारूदी सुरंगों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।

इस बीच ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने दक्षिणी ईरान के सिरिक क्षेत्र में कई धमाकों की पुष्टि की है। हालांकि इन विस्फोटों में हुए नुकसान या अन्य विवरण साझा नहीं किए गए हैं।

दूसरी ओर, ईरान ने कहा कि अमेरिका द्वारा रातभर किए गए हमलों के जवाब में उसने अमेरिकी सेना से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं बहरीन ने भी आरोप लगाया कि उसके क्षेत्र की ओर कई ईरानी ड्रोन भेजे गए। बहरीन के विदेश मंत्रालय ने इसे देश के नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है।

उधर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सेना से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। दोनों देशों के दावों और जवाबी कार्रवाई के बीच सीजफायर लागू होने के बावजूद पश्चिम एशिया में हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।