मामला गोरखपुर विश्वविद्यालय में हरे-भरे पेड़ों की कटाई का, डीएसडब्लू प्रो. अनुभूति दूबे के नेम प्लेट पर मेडल पहनाकर दर्ज कराया विरोध, कहा-विवि प्रशासन छात्रों को गुमराह कर रहा है  

निखिल पांडेय, गोरखपुर

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में सोमवार को उस समय अजीबो गरीब स्थिति पैदा हो गई, जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में काटे गए हरे-भरे पेड़ों में सागौन के वृक्षों को काटने के पीछे विश्वविद्यालय ने हानिकारक विषैला रसायन टैनिक एसिड़ छोड़े जाने का कारण बताते हुए एक ट्वीट कियाl इसके बाद विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के दिए गए तर्क का मजाक उड़ाते हुए डीएसडब्ल्यू डॉक्टर अनुभूति दुबे के कार्यालय पहुंच कर नेम प्लेट पर मेडल पहनाते हुए एक वीडियो शेयर कियाl

ज्ञात हो कि गत दिनों हरे-भरे पेड़ों के काटे जाने को लेकर पहले पार्किंग औऱ विकास निर्माण का हवाला दिया गया थाl फ़िर इसे ऊपर से आया आदेश बताया गयाl इस पर असंतोष व्यक्त करते हुए एबीवीपी कार्यकर्ताओं व छात्रों ने गलत तरीके से 1291 हरे भरे वृक्षों की कटाई को तत्काल रोकने के लिए धरना दिया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पेड़ काटने का कार्य बंद कर दिया था। साथ ही मानक के विपरीत काटे गए पेड़ों की जांच करने की बात कही थीl

अब ट्विटर से ऐसे बयान को देखकर छात्र भड़क गए। आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी कमी को छिपाने के लिए टालमटोल कर रहा है और नया-नया अविष्कार सामने लाकर गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। विश्वविद्यालय के इस बदले हुए ट्रेंड के बाद विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने भी विरोध करने का ट्रेड बदल दिया और प्रशांत त्रिपाठी के नेतृत्व में कार्यकर्ता और छात्र मनोविज्ञान विभाग पहुंच गए।

यहां उन्होंने विवि के तर्क को हास्यसपद वैज्ञानिक खोज करार देते हुए कहा कि ट्वीट से छात्रों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए डीएसडब्लू प्रो. अनुभूति दूबे के नेम प्लेट पर मेडल पहनाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान अभाविप के गोरखपुर महानगर सह मंत्री प्रशांत त्रिपाठी, गोरखपुर विश्विद्यालय मंत्री अरविंद मिश्रा, समीर, अक्षिता, विश्विद्यालय सह मंत्री सौम्या उपाध्याय, अश्विनी, विशाल गोंड व अन्य छात्र शामिल रहे।