जहाज पर हमले में गई जान, मां की चीख से दहला गांव
गणेश धर द्विवेदी
एक पिता कुवैत में पसीना बहा रहा था, ताकि घर बन जाए। बड़ा बेटा ओमान गया था, ताकि तीन छोटे भाइयों की पढ़ाई पूरी हो जाए। लेकिन किसे पता था कि घर संवारने का ये सपना 40 दिन में ही ताबूत में बंद होकर लौटेगा।
गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमाजीतपुर गांव के 23 वर्षीय सूरज यादव की ओमान के पूर्वी तट पर जहाज पर हुए हमले में मौत हो गई। सूरज परिवार में सबसे बड़ा था।

पिता ओम प्रकाश यादव कुवैत में मजदूरी करते हैं। गांव में बूढ़े दादा, मां पुष्पा देवी और तीन छोटे भाई - सन्नी (कक्षा 10), साहिल (कक्षा 9) और सबसे छोटा भाई रहता है। सूरज अविवाहित था और करीब एक माह 10 दिन पहले ही पहली बार फ्लाइट से ओमान गया था।
मां कुछ बोल नहीं पा रही, सिर्फ रो रही है
रविवार को जब 11 दिन बाद सूरज का शव गांव पहुंचा तो मां पुष्पा देवी उसे देखकर दहाड़ मारकर रो पड़ी। वह कुछ बोल नहीं पा रही थीं, बस आंसू बह रहे थे। शव देखते ही पूरे गांव की आंखें नम हो गईं।
चाचा बोले - और किसी के साथ ऐसा न हो
चाचा अवधेश यादव ने रोते हुए कहा, एक महीना पहले ही भतीजा कमाने गया था। अचानक सुना कि जहाज पर हमले में मौत हो गई। हम सरकार से यही मांगते हैं कि गरीब के बच्चे जो कमाने बाहर जाते हैं, उनके साथ ऐसी घटना न हो।
सूरज की मौत की खबर सुनकर उसके पिता ओम प्रकाश यादव भी कुवैत से घर आ गए हैं ।
