मई-जून में और खतरनाक हो सकती है गर्मी, मौसम विभाग की चेतावनी

सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली

इस बार मौसम ने अपना मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। जहां आमतौर पर मई और जून में लू अपने चरम पर होती थी, वहीं अब अप्रैल के आखिरी सप्ताह में ही उत्तर भारत के बड़े हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में आ गए हैं। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत तक लोगों को समय से पहले ही झुलसाने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि दिन ही नहीं, रात में भी गर्म हवाएं चल रही हैं और लोगों को राहत नहीं मिल रही।

26 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन के सबसे अधिक तापमानों में से एक है। प्रयागराज, बाड़मेर, वर्धा और राजनांदगांव जैसे कई शहरों में पारा 45 से 46 डिग्री के बीच बना हुआ है। दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में भी तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिससे गर्मी का असर और तीव्र हो गया है।

"मौसम विभाग के अनुसार जब मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है और सामान्य से 4 से 5 डिग्री ज्यादा रहता है, तब उसे हीटवेव की स्थिति माना जाती है। इस बार यह स्थिति अप्रैल में ही बन गई है, जो मौसम के तेजी से बदलते पैटर्न का संकेत है।"

विशेषज्ञों का मानना है कि इस असामान्य गर्मी के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ की कमी है, जो आमतौर पर उत्तर भारत में बारिश और ठंडक लेकर आते हैं। इसके अलावा राजस्थान की तरफ से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं समय से पहले सक्रिय हो गई हैं। वातावरण में नमी की कमी ने भी तापमान को तेजी से बढ़ने दिया, जिससे गर्मी लगातार बढ़ती चली गई। हालांकि 27 से 30 अप्रैल के बीच कुछ इलाकों में हल्की राहत मिलने की उम्मीद है। इस दौरान गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, जिससे तापमान में अस्थायी गिरावट आएगी। लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अप्रैल से जून के दौरान पूर्वी, मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत में लू के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। मई के पहले सप्ताह में कुछ क्षेत्रों में लू का असर कम रह सकता है, लेकिन तापमान सामान्य से ऊपर ही बना रहेगा। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अधिकतम तापमान 1.6 से 3 डिग्री तक ज्यादा रहने की संभावना है, जबकि कई राज्यों में न्यूनतम तापमान भी 3 डिग्री तक बढ़ सकता है।

हीटवेव का असर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा समेत कई राज्यों में देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रहने के संकेत हैं। जून में मॉनसून की शुरुआत जरूर होगी, लेकिन यह पूरे देश में एकसमान नहीं पहुंचेगा। पश्चिमी घाट और गंगा के मैदानी इलाकों में अच्छी बारिश की संभावना है, जबकि मध्य और पूर्वी हिस्सों में बारिश कम रह सकती है। इस भीषण गर्मी का असर खेती पर भी पड़ने लगा है। गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है और सिंचाई की मांग बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार गर्म रातें शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिससे बुजुर्गों और बच्चों में हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बिना जरूरी काम के दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी और ORS का सेवन करें, हल्के और ढीले कपड़े पहनें और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करें। मौसम के इस बदले रुख ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में गर्मी और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।