होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना से तेल बाजार में लौटी राहत
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में नरमी और संभावित समझौते की खबरों ने सोमवार को वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत दी। दोनों देशों के बीच सहमति बनने के संकेत मिलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों ही 5 फीसदी से अधिक टूटकर पिछले दो सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 5 डॉलर टूटकर 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तनाव कम होने और होर्मुज स्ट्रेट के फिर से सामान्य रूप से खुलने की उम्मीद ने निवेशकों को राहत दी है।
हालांकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। सोमवार को पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह 15 मई के बाद से दस दिनों के भीतर चौथी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को 3 रुपये, 19 मई को 90 पैसे और 23 मई को 87 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की जा चुकी है।
तेल कंपनियों का कहना है कि पिछले दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, लेकिन घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ नहीं डाला गया। इसकी वजह से कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अनुमान के अनुसार तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। अब कंपनियां उसी घाटे की भरपाई करने के लिए धीरे-धीरे कीमतों में इजाफा कर रही हैं।
बाजार में सबसे बड़ी राहत की खबर ईरान की ओर से आई है। अमेरिका के साथ बातचीत में सकारात्मक संकेत मिलने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से सामान्य रूप से खोलने की दिशा में सहमति जताई है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि अगले 30 दिनों में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सकती है।
दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस का आयात-निर्यात होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होता है। ऐसे में इस रास्ते के सामान्य होने की खबर ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में सकारात्मक माहौल बना दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाता है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
भारत के लिए भी यह स्थिति राहत देने वाली मानी जा रही है, क्योंकि देश अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल और गैस पर निर्भर है। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से भारत को तेल और गैस की आपूर्ति सुचारु रूप से मिल सकेगी और आयात लागत में कमी आ सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के बाद बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और समझौते की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चल रहा गतिरोध भी कम होता दिख रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान संवर्धित यूरेनियम और न्यूक्लियर साइट्स से जुड़े कुछ अहम मुद्दों पर नरम रुख अपनाने को तैयार हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और कम होता है तथा होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होने लगता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। इसका असर आने वाले समय में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।