सात जिलों के उद्यमियों ने सीखी कारोबार बढ़ाने की रणनीति, 90 दिन की कार्ययोजना तैयार
गणेश धर द्विवेदी
कारोबार में सिर्फ बिक्री बढ़ाना ही सफलता नहीं है, असली सफलता तब है जब लागत निकालने के बाद पर्याप्त लाभ भी बचे। उत्पाद की कीमत कैसे तय की जाए, ब्रेक-ईवन प्वाइंट क्या हो और ग्राहक तक पहुंचने के लिए कौन सा माध्यम सबसे प्रभावी रहेगा, इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मंगलवार को बरपार स्थित जागृति उद्यम केंद्र के बरगद सभागार में आयोजित तिमाही कार्यशाला में उद्यमियों को जानकारी दी गई।
कार्यशाला में देवरिया सहित कुशीनगर, गोरखपुर, महाराजगंज, संतकबीर नगर, बलिया और मऊ के उद्यमियों ने भाग लिया। जेए कंसल्टिंग के पार्टनर विवेक भटनागर ने यूनिट इकॉनॉमिक्स, मूल्य निर्धारण और बाजार तक पहुंचने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बिक्री और लाभ को एक समान मानना कारोबार के लिए बड़ी भूल हो सकती है।
उन्होंने उद्यमियों को उत्पाद की कीमत तय करते समय कच्चे माल, पैकेजिंग, श्रम और परिवहन जैसी परिवर्तनीय लागत के साथ स्थिर खर्च को भी शामिल करने की सलाह दी। प्रति इकाई बिक्री मूल्य, परिवर्तनीय लागत, योगदान, मासिक स्थिर खर्च और बिक्री मात्रा जैसे पांच प्रमुख आंकड़ों पर नियमित नजर रखने को कारोबार की मजबूती के लिए जरूरी बताया।
कार्यशाला में ब्रेक-ईवन की गणना भी समझाई गई। उद्यमियों को बताया गया कि कारोबार को लागत निकालने के लिए न्यूनतम कितनी बिक्री करनी होगी, इसकी जानकारी होना बेहद जरूरी है। साथ ही बाजार की प्रतिस्पर्धी कीमत, लागत और ग्राहक को मिलने वाले लाभ को ध्यान में रखकर मूल्य निर्धारण की रणनीति बनाने पर जोर दिया गया।
बाजार रणनीति के तहत उद्यमियों को प्राथमिक ग्राहक की पहचान, उपयुक्त बिक्री माध्यम के चयन और शुरुआती ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर उत्पाद या सेवा में सुधार करने की सलाह दी गई। अंत में सभी उद्यमियों ने अगले 90 दिनों के लिए मापने योग्य लक्ष्य तय किए और सात, 30 तथा 90 दिन की कार्ययोजना तैयार की।
इस अवसर पर इन्क्यूबेशन निदेशक विश्वास पांडेय, उद्यम कोर नित्या सिंह, रवि यादव, खुशबू शर्मा, मारकंडेय दयाल त्रिपाठी सहित अन्य मौजूद रहे।
