भूपेंद्र यादव ने पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन और मानव विकास को साथ लेकर चलने पर दिया जोर
नई दिल्ली : जलवायु परिवर्तन से लेकर जंगलों की आग और जैव विविधता के नुकसान तक बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल नीतियां बनाने से नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने और स्थानीय समुदायों को साथ लेकर चलने से निकलेगा। भारत ने अपनी अध्यक्षता में आयोजित 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में आज Iइसी सोच के साथ जन-केंद्रित और कार्यान्वयन-उन्मुख पर्यावरणीय कार्रवाई का आह्वान किया। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि ज्ञान साझाकरण, तकनीकी आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और मजबूत संस्थागत साझेदारी के जरिए ब्रिक्स आपसी सहयोग को सामूहिक क्षमता में बदल सकता है।
नई दिल्ली में आयोजित बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों का स्वागत करते हुए यादव ने कहा कि भारत की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस दृष्टि से प्रेरित है, जिसमें वैश्विक दक्षिण और विकासशील देशों की चिंताओं को एजेंडे में प्रमुखता दी गई है। भारत ब्रिक्स को सहयोग, संवहनीयता और नवाचार के ऐसे मंच के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है, जिसमें लोगों और मानवता के हित केंद्र में रहें।
यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का क्षय, प्रदूषण और आपदा जोखिम जैसी चुनौतियां लगातार गंभीर हो रही हैं। विकासशील देशों में पर्यावरणीय असुरक्षा का सीधा संबंध उनकी विकास संबंधी प्राथमिकताओं से भी जुड़ा है। उन्होंने जंगलों में आग की रोकथाम, तैयारियों, शुरुआती चेतावनी, आपात प्रतिक्रिया और आग लगने के बाद प्रभावित क्षेत्रों के प्रबंधन में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। इसके साथ जलवायु वित्त, अनुकूलन और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने पर भी जोर दिया।
भारत ने बैठक में पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन और मानव विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का दृष्टिकोण रखा। मिशन लाइफ और एक पेड़ मां के नाम जैसी पहलों का उदाहरण देते हुए यादव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व महत्वपूर्ण है।
उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की जरूरत बताई, ताकि पर्यावरणीय समाधान वैज्ञानिक रूप से मजबूत होने के साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल और सामाजिक रूप से समावेशी हों। उन्होंने 2031-2035 के लिए भारत के नए राष्ट्रीय निर्धारित योगदान का उल्लेख करते हुए इसे समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा के साथ जलवायु कार्रवाई की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता बताया।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत चार प्रमुख प्राथमिकताएं भी सामने रखी गईं। इनमें संवहनीय जीवनशैली को बढ़ावा देना, वनरोपण के साथ वन अग्नि प्रबंधन और आपदाओं से निपटने की क्षमता मजबूत करना, चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा जलवायु अनुकूलन शामिल हैं। यादव ने कहा कि पर्यावरणीय कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए, जो जन-केंद्रित, संवहनीय, जमीन पर लागू करने योग्य और विकासशील देशों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप हो।


दो दिवसीय बैठक का समापन संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य को सर्वसम्मति से अपनाने और चार ज्ञान संकलनों के साथ हुआ। इसमें संवहनीय जीवनशैली पर ज्ञान साझाकरण, अनुसंधान और नवाचार के लिए ब्रिक्स संस्थानों का नेटवर्क विकसित करने, मरुस्थलीकरण एवं सतत भूमि प्रबंधन के लिए एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के सिद्धांत तैयार करने, जंगल की आग से निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया पर साझा सहमति तथा पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित और समुदाय आधारित जलवायु अनुकूलन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन पर उच्च स्तरीय संवाद और एकीकृत भूदृश्य आधारित हरियाली पर चर्चा भी हुई। इसमें आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को पारंपरिक ज्ञान एवं स्थानीय प्रथाओं के साथ जोड़ने तथा सदस्य देशों के सफल पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन अनुभवों को साझा करने पर जोर दिया गया।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कार्यक्रम स्थल पर डिजिटल एवं इंटरैक्टिव मिशन लाइफ पवेलियन भी स्थापित किया। इसमें गेमिंग और इंटरैक्टिव तकनीक के माध्यम से भारत की प्रमुख पर्यावरणीय पहलों को प्रदर्शित किया गया। ब्रिक्स प्रतिनिधियों के लिए भारतीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनमें भारतीय संस्कृति की विविधता और जीवंतता की झलक देखने को मिली।

