विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’ का किया जलावतरण। पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप की रखी नींव
विशाखापत्तनम। हिंद महासागर के दूरदराज इलाकों में लंबे समय तक अभियान चलाने वाली भारतीय नौसेना को मंगलवार को नई ताकत मिली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) में पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-1) ‘सूर्य’ का जलावतरण किया। इसी मौके पर उन्होंने पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-5) की नींव रखी और उन्नत स्लिपवे-4 तथा 300 टन क्षमता वाली गोलियाथ क्रेन का उद्घाटन भी किया। इससे बड़े और महत्वपूर्ण जहाजों के स्वदेशी निर्माण की क्षमता और मजबूत होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि एफएसएस-1 का जलावतरण सफलता का प्रतीक है, एफएसएस-5 की नींव दृढ़ संकल्प और नया स्लिपवे देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एचएसएल अपनी जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ भारत की समुद्री शक्ति की नींव भी मजबूत कर रहा है।
राजनाथ सिंह ने 1948 में विशाखापत्तनम में स्वतंत्र भारत में निर्मित पहले जहाज ‘जल उषा’ के जलावतरण को याद किया। उन्होंने एचएसएल को देश की राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का संरक्षक बताते हुए आठ दशकों से अधिक समय से समुद्री और रक्षा जरूरतों में उसके योगदान की सराहना की। उन्होंने एचएसएल को 2025 में मिले मिनीरत्न श्रेणी-I के दर्जे को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि फ्लीट सपोर्ट शिप हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की पहुंच और परिचालन क्षमता को मजबूत करेंगे। दूर समुद्र में लंबे समय तक अभियान चलाने के लिए युद्धपोतों को रसद, रखरखाव और लगातार सहायता की जरूरत होती है। ये पोत समुद्र में ही जरूरी आपूर्ति और सहायता उपलब्ध कराकर नौसैनिक अभियानों को लंबे समय तक जारी रखने में मदद करेंगे।
नेवी वाइव्स वेलनेस एसोसिएशन की अध्यक्ष लैला स्वामीनाथन द्वारा पारंपरिक सम्मान समारोह पूरा किए जाने के बाद ‘सूर्य’ का जलावतरण किया गया और पोत बंगाल की खाड़ी में उतरा। एचएसएल में स्वदेशी रूप से निर्मित इस पोत में उन्नत कार्गो और तरल पदार्थ परिवहन क्षमता, आधुनिक रखरखाव कार्यशालाएं, बहु-भूमिका हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए अलग हेलीकॉप्टर डेक और आत्मरक्षा प्रणालियां होंगी।
एचएसएल के उन्नत स्लिपवे-4 का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया गया है। अब यहां 45 हजार डीडब्ल्यूटी तक के जहाजों का निर्माण और जलावतरण किया जा सकेगा। स्लिपवे-3 और 4 को जोड़ने वाली 300 टन क्षमता की गोलियाथ क्रेन ‘मेक इन इंडिया’ के तहत एलएंडटी जियोस्ट्रक्चर और कोनेक्रेन्स ने डिजाइन और निर्मित की है। पीएलसी नियंत्रण, वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव, टैंडम लिफ्टिंग, रिमोट डायग्नोस्टिक्स और कंडीशन मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस यह क्रेन भारी ब्लॉकों को तेजी और अधिक सटीकता से संभाल सकेगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन अगला लक्ष्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा होना चाहिए। भारतीय शिपयार्ड को गुणवत्ता, लागत, प्रौद्योगिकी, समय पर आपूर्ति और विश्वसनीयता के मामले में दुनिया के अग्रणी शिपयार्ड से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाना होगा। उन्होंने एचएसएल को आंध्र प्रदेश के एमएसएमई, विश्वविद्यालयों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ जोड़कर व्यापक जहाज निर्माण तंत्र विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना कमान, नौसेना डॉकयार्ड, एचएसएल और बंदरगाह की मौजूदगी को शहर की बड़ी ताकत बताया। नौसेना की विशेषज्ञता, जहाज निर्माण क्षमता, इंजीनियरिंग प्रतिभा, बंदरगाह ढांचे और कुशल मानव संसाधन को एक साथ जोड़कर विशाखापत्तनम को प्रमुख समुद्री औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। इसके लिए नौसेना, एचएसएल, डीआरडीओ, शिक्षा जगत, उद्योग, एमएसएमई और स्टार्टअप के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई।
राजनाथ सिंह ने कहा कि लक्ष्य बेहतर डिजाइन, तेजी से निर्माण, समय पर आपूर्ति, कुशल संचालन और प्रभावी रखरखाव होना चाहिए। उन्होंने एचएसएल से समय पर आपूर्ति को संगठन की कार्यसंस्कृति बनाने, स्वदेशी निर्माण क्षमता बढ़ाने और एमएसएमई व स्टार्टअप के साथ साझेदारी मजबूत करने को कहा। उन्होंने भारतीय शिपयार्ड को आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए जहाज निर्माण, समुद्री प्रौद्योगिकी, जहाज मरम्मत और रखरखाव सेवाओं में भी वैश्विक मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया।
