भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर मनेगा भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव, घर-घर सजेंगे लड्डू गोपाल

नई दिल्ली : भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए चार सितंबर का दिन विशेष होगा। इसी दिन जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। घरों से लेकर मंदिरों तक कान्हा के स्वागत की तैयारियां होंगी। लड्डू गोपाल का अभिषेक और श्रृंगार किया जाएगा, पालने सजेंगे और माखन-मिश्री का भोग लगाकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाएगी।

पंचांग के अनुसार और बिहार के ज्योतिषाचार्य संतोष के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 4 सितंबर को अष्टमी तिथि रहेगी। वहीं, इस दिन रोहिणी नक्षत्र रात 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा के लिए रात्रि के समय अष्टमी तिथि का होना विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। इस गणना के आधार पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाना अधिक उचित रहेगा। 

हिंदू धर्म में जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और व्रत करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

जन्माष्टमी की पूजा में लड्डू गोपाल के भोग का विशेष महत्व माना जाता है। कान्हा को माखन प्रिय होने के कारण माखन-मिश्री अर्पित करने की परंपरा है। इसके साथ धनिये की पंजीरी, फल और मिठाई भी भोग में रखी जा सकती है। चरणामृत या पंचामृत को भी पूजा और भोग सामग्री में शामिल किया जाता है। भगवान को भोग अर्पित करते समय तुलसी दल रखना विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक परंपरा में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा में तुलसी का विशेष स्थान है।

लड्डू गोपाल के अभिषेक के लिए पंचामृत और गंगाजल की व्यवस्था की जाती है। पूजा की थाली में पीला चंदन, रोली, घी का दीपक, रुई की बाती, धूप और कपूर भी रखा जाता है। अभिषेक के बाद लड्डू गोपाल को स्वच्छ वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है और फिर भोग अर्पित कर आरती की जाती है।कान्हा के श्रृंगार में मोर पंख और बांसुरी का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा स्थल को पीले फूलों से सजाने के साथ लड्डू गोपाल के लिए सुंदर पालना भी तैयार किया जाता है। श्रीकृष्ण जन्म के बाद श्रद्धालु कान्हा को पालने में झुलाते हैं, भोग अर्पित करते हैं और आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगल की कामना करते हैं।