- एलपीजी सिलिंडर के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी, देशभर में नई दरें लागू। पिछले तीन महीनों में दूसरी बार बढ़े दाम
नई दिल्ली : महंगाई की मार झेल रहे आम उपभोक्ताओं को एक और बड़ा झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरों के लागू होने के बाद देशभर के लाखों परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होने की आशंका है। रसोई के सबसे जरूरी ईंधनों में शामिल एलपीजी की कीमत बढ़ने से घरेलू खर्च में और इजाफा होगा, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है।
नई कीमतों के अनुसार 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर के लिए उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में 29 रुपये अधिक चुकाने होंगे। राजधानी दिल्ली में सिलिंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। इसी प्रकार देश के विभिन्न शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। पटना में घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमत 1,031.50 रुपये पहुंच गई है, जो प्रमुख शहरों में सबसे अधिक कीमतों में शामिल है। वहीं कोलकाता और भुवनेश्वर में यह 968 रुपये, लखनऊ में 979.50 रुपये और हैदराबाद में 994 रुपये हो गई है।
यह पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी की दूसरी मूल्य वृद्धि है। इससे पहले 7 मार्च को घरेलू गैस सिलिंडर के दामों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। लगातार दूसरी बार कीमत बढ़ने से घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने खासकर उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जो पहले से ही महंगाई के दबाव का सामना कर रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत इस मूल्य वृद्धि की प्रमुख वजह है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनावपूर्ण संबंध तथा समुद्री आपूर्ति मार्गों पर बढ़ते जोखिमों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इसके कारण एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार दबाव बना हुआ है, जिसका असर अब भारतीय उपभोक्ताओं पर भी दिखाई दे रहा है।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, मार्च में कीमत बढ़ाए जाने के बावजूद सरकारी तेल विपणन कंपनियों को घरेलू एलपीजी की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। ताजा बढ़ोतरी से पहले कंपनियों को प्रत्येक घरेलू सिलिंडर पर लगभग 703 रुपये का घाटा हो रहा था। ऐसे में बढ़ती लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालना आवश्यक माना गया।
महंगाई का असर केवल एलपीजी तक सीमित नहीं है। मई के मध्य से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हो चुकी है। वहीं सीएनजी के दामों में भी लगभग 6 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईंधनों की लगातार बढ़ती कीमतों का असर परिवहन लागत पर पड़ रहा है, जिसका प्रभाव आगे चलकर रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
सूत्रों का कहना है कि मूल्य संशोधनों के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां अब भी दबाव में हैं। अनुमान है कि कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 33.6 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि ऊर्जा क्षेत्र में मूल्य संतुलन बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
