57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में कारोबार आसान बनाने पर जोर, तीन दिन में रजिस्ट्रेशन और रिफंड की व्यवस्था, छोटी गलतियों पर नोटिस से राहत

नई दिल्ली। जीएसटी रिटर्न भरने में छोटी गलती हो जाए, रिफंड महीनों अटका रहे या मामूली विवाद में नोटिस आ जाए तो कारोबारियों की परेशानी बढ़ जाती है। अब ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने कर व्यवस्था में बड़े बदलावों की दिशा में कदम बढ़ाया है। गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में दस प्रमुख सुधारों पर चर्चा हुई। इनमें गिरफ्तारी का अधिकार समाप्त करने, कानूनी कार्रवाई की सीमा बढ़ाने और अधिकांश प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने जैसे महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं।

बैठक का मुख्य उद्देश्य टैक्स दरें घटाना-बढ़ाना नहीं, बल्कि व्यापारियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और अधिकारियों के हस्तक्षेप से राहत दिलाना रहा। कम जोखिम वाले कारोबारियों को तीन दिन में स्वतः जीएसटी पंजीकरण देने की व्यवस्था पर जोर दिया गया। करीब 61 प्रतिशत पंजीकरण पहले से इसी प्रक्रिया के माध्यम से हो रहे हैं। नाम, पता और अन्य विवरण बदलने की प्रक्रिया भी आसान होगी।

रिफंड के मामले में आवेदन स्वीकार करने की समयसीमा 15 से घटाकर दस दिन करने और पात्र मामलों में 90 प्रतिशत राशि तीन कार्यदिवस के भीतर जारी करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। अतिरिक्त जमा रकम की वापसी भी स्वचालित होगी।

रिटर्न में मामूली गलतियों से होने वाली परेशानी कम करने पर भी ध्यान दिया गया। वर्तमान व्यवस्था में सालाना करीब 95 हजार नोटिस जारी होते हैं, जबकि उनसे वसूली महज 0.08 प्रतिशत बताई गई है। अब पुरानी प्रविष्टियां और गलत जीएसटी नंबर सुधारने की सुविधा बढ़ाई जाएगी।

दस हजार रुपये से कम के मामलों में नोटिस नहीं भेजने, सामान्य जुर्माना 25 हजार से घटाकर दस हजार रुपये करने और आपराधिक मुकदमे की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने जैसे बदलावों पर भी जोर दिया गया। गिरफ्तारी संबंधी अधिकार समाप्त करने का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पांच करोड़ रुपये तक सालाना कारोबार वाले पात्र छोटे व्यापारियों को वर्ष में एक बार रिटर्न और तिमाही आधार पर टैक्स भुगतान की सुविधा देने की बात कही गई है। कारोबार बंद करने पर पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया भी स्वचालित होगी।

सड़क पर मालवाहक वाहनों की अनावश्यक जांच रोकने के लिए संयुक्त आयुक्त स्तर की मंजूरी आवश्यक करने और बीच के राज्यों में बेवजह वाहन रोकने पर अंकुश लगाने का प्रस्ताव है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े विवादों में ईमानदार खरीदारों को राहत देने के लिए समिति गठित करने तथा तीन महीने में रिपोर्ट लेने की बात भी सामने आई है। कर्मचारियों के बीमा, मशीनरी और औद्योगिक सेवाओं से संबंधित टैक्स क्रेडिट तथा रिफंड नियमों में सुधार पर विचार किया गया।

छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं को दूसरे राज्यों में ई-कॉमर्स कंपनियों के गोदाम इस्तेमाल करने की सुविधा और सभी प्लेटफॉर्म के लिए समान कर नियमों पर भी जोर दिया गया। विदेशी ग्राहकों के सामान की मरम्मत, परीक्षण और अनुसंधान जैसी सेवाओं को निर्यात संबंधी लाभ देने का प्रस्ताव है।

बैठक में जीएसटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य व्यापारियों का समय और खर्च बचाना तथा कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है। हालांकि, विभिन्न बदलावों का वास्तविक लाभ संबंधित कानूनी प्रावधान और अधिसूचनाएं लागू होने के बाद ही मिलेगा।