भारत में 17 जून से मुहर्रम की शुरुआत मानी गई, जबकि आशूरा 26 जून को पड़ने की संभावना है
नई दिल्ली : इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसी महीने से इस्लामी नए साल की शुरुआत होती है। यही कारण है कि इसे इस्लाम के सबसे पाक महीनों में गिना जाता है। मुहर्रम केवल नए वर्ष का पहला महीना नहीं, बल्कि इबादत, आत्मचिंतन, इंसानियत, सब्र और नेक कार्यों का संदेश देने वाला महीना भी माना जाता है। इसकी शुरुआत चांद दिखने के आधार पर होती है, इसलिए अलग-अलग देशों में इसकी तिथि अलग हो सकती है।
इस वर्ष सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान और कतर सहित कई अरब देशों में मुहर्रम की शुरुआत 16 जून से हो चुकी है। वहीं भारत और आसपास के कई देशों में चांद दिखाई देने के बाद 17 जून से इस्लामी नए साल का आगाज माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मुहर्रम का महीना लोगों को अल्लाह की इबादत के करीब लाता है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग अपने जीवन, कर्मों और आध्यात्मिक यात्रा पर विशेष चिंतन करते हैं। माना जाता है कि इस पूरे महीने में किए गए हर नेक काम का विशेष महत्व होता है। इसलिए लोग जरूरतमंदों की सहायता, दान-पुण्य, सद्भाव और अच्छे व्यवहार को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का प्रयास करते हैं।
मुहर्रम लोगों को यह भी संदेश देता है कि इंसानियत हर परिस्थिति में सर्वोपरि है। कठिन से कठिन समय में भी सत्य, न्याय और सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। यही वजह है कि मुहर्रम को उत्सव और आनंद का महीना नहीं, बल्कि इबादत, संयम, आत्ममंथन और आध्यात्मिक चिंतन का समय माना जाता है।
मुहर्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन दसवीं तारीख होती है, जिसे यौम-ए-आशूरा कहा जाता है। इस दिन करबला की ऐतिहासिक लड़ाई में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों द्वारा दी गई महान कुर्बानी को याद किया जाता है। उन्होंने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय सत्य और इंसाफ की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी शहादत आज भी पूरी दुनिया को सत्य, न्याय, साहस और मानवता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।
आशूरा के दिन बड़ी संख्या में लोग रोजा रखते हैं, विशेष नमाज अदा करते हैं और अल्लाह से अपनी दुआओं की कबूलियत की प्रार्थना करते हैं। इसके साथ ही जरूरतमंदों की सहायता, दान-पुण्य, आत्मचिंतन और नेक कार्यों के माध्यम से इस दिन को विशेष रूप से मनाया जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार आशूरा का मूल संदेश इंसानियत, भाईचारा, त्याग और अल्लाह की इबादत के साथ समाज में अच्छाई फैलाना है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार इस वर्ष सऊदी अरब, यूएई, ओमान और अन्य अरब देशों में यौम-ए-आशूरा 25 जून को मनाया जा सकता है। वहीं भारत में इसके 26 जून को पड़ने की संभावना है। हालांकि अंतिम तिथि का निर्धारण चांद दिखाई देने के बाद ही किया जाएगा।
मुहर्रम का महीना हर वर्ष यह संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, इंसान को सत्य, न्याय, इंसानियत और ईमानदारी का रास्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए। यही इस पवित्र महीने और हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी की सबसे बड़ी सीख मानी जाती है।
