रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा। आरबीआई ने आर्थिक विकास को लेकर भरोसा जताते हुए जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाया

नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी ताजा समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य बैंक ऋण की ईएमआई में कोई कमी नहीं आएगी। जिन लोगों को ब्याज दरों में राहत की उम्मीद थी, उन्हें अगली मौद्रिक नीति समीक्षा का इंतजार करना होगा।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पहली तिमाही में खुदरा महंगाई अनुमान से कुछ कम रही, जिससे यह संकेत मिलता है कि लागत बढ़ने का असर कीमतों पर व्यापक रूप से नहीं पड़ा है। हालांकि हाल के समय में खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों ने महंगाई पर दबाव बनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कीमती धातुओं को छोड़कर मूल महंगाई दर अब भी नियंत्रण में है और पहले के अनुमान के अनुरूप बनी हुई है।

रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत रखा है, जो पहले के अनुमान से 10 आधार अंक कम है। केंद्रीय बैंक के अनुसार पहली तिमाही में महंगाई 5.3 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 4.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आरबीआई का मानना है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें नरमी आने की संभावना है।

गवर्नर ने कहा कि अल-नीनो का असर, मानसून का असमान वितरण, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव महंगाई के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं। वहीं विनिर्माण क्षेत्र पर लागत का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ती विविधता इसके प्रभाव को कम करने में मदद करेगी।

आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर आरबीआई ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.6 प्रतिशत था। साथ ही दूसरी तिमाही (Q2) के विकास अनुमान में भी सुधार किया गया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और मजबूत घरेलू मांग आर्थिक गतिविधियों को लगातार समर्थन दे रही है।