287 उम्मीदवारों में से दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद का चयन, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर दे चुकी हैं सेवाएं

दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के साथ इस बार भारतीय मूल की एक महिला न्यायविद का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। दक्षिण अफ्रीका की नवनेथम 'नवी' पिल्लई को वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनके लंबे योगदान को देखते हुए नॉर्वे की नोबेल समिति ने यह सम्मान देने का निर्णय लिया है। वहीं, पुरस्कार पाने की इच्छा कई बार जाहिर कर चुके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बार भी यह सम्मान नहीं मिला।

इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार के लिए दुनियाभर से 287 नाम प्रस्तावित किए गए थे। इनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल थे। पुरस्कार की घोषणा से पहले सूडान में राहत एवं बचाव कार्य करने वाले समूहों और कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के नाम भी संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में थे। हालांकि, नोबेल समिति नामांकन से जुड़ी जानकारी गोपनीय रखती है। ऐसे में चर्चित नामों को आधिकारिक उम्मीदवारों की सूची मानना सही नहीं होगा।

भारतीय तमिल मूल की नवी पिल्लई का जीवन नस्ली भेदभाव के खिलाफ संघर्ष और न्याय की स्थापना के प्रयासों से जुड़ा रहा है। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर में उन्होंने कानून के माध्यम से समानता और मानवाधिकारों की आवाज उठाई। वह दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनने वाली पहली गैर-श्वेत महिला थीं।

अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं में भी पिल्लई ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह रवांडा के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण की अध्यक्ष रहीं और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 2008 से 2014 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त का पद संभाला। इस दौरान मानवाधिकारों की रक्षा और गंभीर अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों में उनकी भूमिका रही।

नोबेल समिति ने अंतरराष्ट्रीय कानून के जरिए संघर्षों का समाधान खोजने और न्याय को शांति की बुनियाद बनाने में पिल्लई के योगदान को विशेष महत्व दिया है। उनका चयन ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया के अनेक हिस्सों में युद्ध, हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।

इस वर्ष पुरस्कार के साथ 1.20 करोड़ स्वीडिश क्रोनर की राशि भी प्रदान की जाएगी। औपचारिक सम्मान समारोह 10 दिसंबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित होगा।