पाकिस्तान के जरिए व्हाइट हाउस तक पहुंचा प्रस्ताव, कूटनीति तेज, अमेरिका की सख्त शर्तों के चलते समझौते की राह अभी भी मुश्किल
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया शांति प्रस्ताव रखकर कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए सीधे व्हाइट हाउस तक पहुंचाया गया है, जिससे यह साफ होता है कि तेहरान अब तीसरे देश के माध्यम से बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान का यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत लगभग ठप पड़ चुकी है और दूसरे दौर की वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है तो उसे पहल करनी होगी, हालांकि उन्होंने दो टूक कहा है कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिया जाएगा। इससे पहले अमेरिका ईरान के पुराने प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं था और इसी वजह से ट्रंप ने अपनी टीम को ईरान भेजने की योजना भी रद्द कर दी थी।
नए प्रस्ताव में ईरान ने बातचीत को दो चरणों में आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है। पहले चरण में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से नाकेबंदी हटाने, अमेरिकी प्रतिबंध खत्म करने और या तो युद्धविराम को बढ़ाने या फिर संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की गई है। ईरान का साफ कहना है कि जब तक क्षेत्र में सैन्य तनाव और आर्थिक दबाव खत्म नहीं होगा, तब तक किसी भी तरह की सार्थक बातचीत संभव नहीं है।
दूसरे चरण में, यानी हालात सामान्य होने के बाद, परमाणु कार्यक्रम को लेकर चर्चा शुरू करने की बात कही गई है। इसके साथ ही ईरान ने सुरक्षा की गारंटी, युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजा और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक नया अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा तैयार करने की मांग भी रखी है।
इस बीच ईरान की कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल ही में पाकिस्तान पहुंचे थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सैन्य प्रमुखों के साथ बातचीत की थी। इसके बाद वे ओमान गए थे और अब रूस रवाना हो चुके हैं, जहां उनकी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरान क्षेत्रीय तनाव और संभावित समाधान पर चर्चा हो सकती है।
हालांकि, इस नए प्रस्ताव के बावजूद किसी ठोस नतीजे तक पहुंचना आसान नहीं दिख रहा है। अमेरिका की मुख्य शर्त है कि ईरान कम से कम 10 साल तक अपने परमाणु कार्यक्रम, खासकर यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह रोक दे और अपने मौजूदा भंडार को देश से बाहर करे। वाशिंगटन कई बार साफ कर चुका है कि इन शर्तों के बिना न तो युद्धविराम संभव है और न ही कोई व्यापक समझौता।
ऐसे में ईरान का यह नया शांति प्रस्ताव भले ही कूटनीतिक पहल के रूप में अहम हो, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दोनों देशों के बीच सहमति बनना अभी भी काफी कठिन नजर आ रहा है।