मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर एकजुट हुए विपक्षी दल। ममता बनर्जी ने ईवीएम में गड़बड़ी और कथित वोट चोरी के लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली : चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के संविधान क्लब में बुधवार को करीब तीन घंटे चली विपक्षी गठबंधन की बैठक में 20 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की गई। साथ ही चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई।
तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कथित वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के जरिए चुनाव परिणामों को प्रभावित किया गया। ममता ने मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार और छत्तीसगढ़ का उल्लेख करते हुए भाजपा की जीत पर सवाल उठाए। उन्होंने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए दावा किया कि मशीनों को जलाया और हैक किया गया। साथ ही पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कथित चुनावी गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं और उनका जवाब मिलना चाहिए। अपने संबोधन में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए बेहद कड़े शब्दों का भी इस्तेमाल किया। विपक्षी दल पहले भी चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
बैठक के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं पर हमला किया जा रहा है। राहुल ने कहा कि विपक्ष इसे चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगा और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वालों की जवाबदेही तय करने के लिए संघर्ष करेगा। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने बिहार में भी कथित वोट चोरी का आरोप लगाया और मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग पर कठपुतली की तरह काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बैठक में राहुल गांधी, ममता बनर्जी सहित कई नेताओं ने अपने सुझाव रखे। इसके बाद चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त रूप से आंदोलन करने का फैसला किया गया।
विपक्षी गठबंधन ने दो से आठ अक्टूबर के बीच ‘लोकतंत्र बचाओ’ कार्यक्रम चलाने की घोषणा की है। इसमें युवाओं, गठबंधन के कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों से जुड़े लोगों को शामिल किया जाएगा। छह अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च करने की योजना है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़े सवालों को मिलकर उठाया जाएगा।
