केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सातवीं राष्ट्रीय फार्मुलरी 2026 और एडीआर-पीवीपीआई 2.0 मोबाइल ऐप किया लॉन्च

नई दिल्ली। कोई दवा मरीज को फायदा पहुंचाने के बजाय प्रतिकूल असर डाल रही हो या चिकित्सा उपकरण और प्रत्यारोपण से जुड़ी कोई परेशानी सामने आए तो उसकी पहचान और सूचना अब अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। रोगी सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए सरकार ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के साथ अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी को भी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके लिए जैव सतर्कता कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग की ओर से नई दिल्ली में आयोजित छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह कार्यक्रम में सातवीं राष्ट्रीय फार्मुलरी 2026 का शुभारंभ किया। इसके साथ चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए अस्पतालों का मार्गदर्शन दस्तावेज तथा आईओएस उपयोगकर्ताओं के लिए एडीआर-पीवीपीआई 2.0 मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया। ऐप के जरिए दवाओं से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों की ऑनलाइन सूचना दी जा सकेगी। राष्ट्रीय फार्मुलरी डिजिटल रूप में भी उपलब्ध कराई गई है।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि दवाओं का तर्कसंगत इस्तेमाल और उनकी लगातार सुरक्षा निगरानी जनस्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मरीज को सही गुणवत्ता वाली उचित दवा सही तरीके से और अधिकतम सुरक्षा के साथ मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने दवाओं के दुष्प्रभाव से जुड़े आंकड़ों को जुटाने, उनका विश्लेषण करने और सुरक्षा संबंधी वैज्ञानिक प्रमाण तैयार करने की मजबूत स्वदेशी व्यवस्था विकसित की है।

भारत की इस क्षेत्र में वैश्विक भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। मंत्री के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन के रोगी सुरक्षा डेटाबेस में योगदान के मामले में भारत 2009-14 के दौरान 123वें स्थान से आगे बढ़कर अब आठवें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने इसे देश की अपनी फार्माकोविजिलेंस क्षमता मजबूत होने का संकेत बताया।

सरकार ने रोगी सुरक्षा व्यवस्था का दायरा बढ़ाते हुए जैव सतर्कता कार्यक्रम को भी मंजूरी दी है। भारतीय फार्माकोपिया आयोग अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाली दवाओं तथा जैविक उत्पादों से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों की सूचना, मूल्यांकन, निगरानी और रोकथाम में प्रमुख भूमिका निभाएगा। इसमें दाता और प्राप्तकर्ता से जुड़े अंग एवं ऊतक भी शामिल होंगे। फार्माकोविजिलेंस, मैटेरियोविजिलेंस और बायोविजिलेंस के जरिए दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं की सुरक्षा निगरानी को एक व्यापक स्वरूप देने की तैयारी है।

सातवीं राष्ट्रीय फार्मुलरी में 34 अध्याय, 20 परिशिष्ट और 653 औषधियां शामिल हैं। इनमें 42 निश्चित खुराक संयोजन और 30 प्रतिरक्षात्मक औषधियों की जानकारी है। औषधि मोनोग्राफ को राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनुरूप संशोधित किया गया है। इसका उद्देश्य चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों को दवाओं के सुरक्षित तथा तर्कसंगत इस्तेमाल के लिए साक्ष्य आधारित जानकारी उपलब्ध कराना है।

देश के सरकारी और निजी अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों में करीब 1,150 दवा प्रतिकूल प्रभाव रिपोर्टिंग केंद्र काम कर रहे हैं। सरकार इन सुविधाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। दवा सुरक्षा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत डेटा विश्लेषण के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। भारत की औषधि मानक प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता भी बढ़ी है। करीब 25 देश भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देते हैं। भारतीय फार्माकोपिया आयोग 2023 में फार्माकोपियल डिस्कशन ग्रुप का सदस्य भी बना था।

17 से 23 सितंबर तक मनाए जा रहे छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह का विषय दवाओं के तर्कसंगत उपयोग और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित है। अनुप्रिया पटेल ने रोगियों से भी दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की सूचना देने में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि दवा सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी है और प्रतिकूल प्रभाव की हर सूचना किसी जीवन को बचाने में मददगार हो सकती है।