जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने इंटर-मिनिस्ट्रीयल बैठक के बाद दी जानकारी, बताया, नयारा और रिलायंस की गतिविधियों पर भी टिकी ऊर्जा बाजार की नजर

सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है। इंटर-मिनिस्ट्रीयल बैठक के बाद जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। हालांकि, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं, जिसका असर व्यापारिक प्रतिष्ठानों और होटल उद्योग पर पड़ सकता है।

सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 30 अप्रैल को 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। यह अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होरमुज के आसपास बने अस्थिर हालात ने तेल टैंकरों की आवाजाही को प्रभावित किया, जिससे पूरी दुनिया में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इस स्थिति को इतिहास की सबसे बड़ी सप्लाई बाधाओं में से एक बताया है। इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ने की आशंका थी, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है, जहां अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हर बदलाव का असर घरेलू बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ता है।

बैठक के दौरान ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों की गतिविधियों पर भी चर्चा हुई। जॉइंट सेक्रेटरी ने जानकारी दी कि नयारा एनर्जी मई के मध्य तक अपना संचालन सामान्य रूप से शुरू कर सकती है। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी क्रूड यूनिट को रखरखाव के लिए तीन से चार सप्ताह तक बंद रखेगी। माना जा रहा है कि इन गतिविधियों का असर आने वाले दिनों में तेल आपूर्ति और बाजार संतुलन पर पड़ सकता है।

हालांकि, बाजार में बाद में कुछ राहत भी देखने को मिली। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 99.79 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। इससे पहले भी इसमें लगभग सात प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों के बाद आई।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि व्हाइट हाउस ईरान के साथ समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बताया गया कि इस पहल का उद्देश्य युद्ध जैसे हालात को समाप्त करना और परमाणु वार्ता के लिए नई रूपरेखा तैयार करना है। दो अमेरिकी अधिकारियों और अन्य सूत्रों के हवाले से सामने आई इन खबरों ने वैश्विक बाजार को राहत का संकेत दिया।

इसके बावजूद ऊर्जा बाजार को लेकर अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में हालात कभी भी बदल सकते हैं और इसका सीधा असर तेल कीमतों पर दिखाई देगा। भारत के लिए फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।