ईद-अल-अजहा को लेकर मुस्लिम समुदाय में बढ़ा उत्साह

सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली

दुनियाभर के मुस्लिम समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों में शामिल बकरीद को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। ईद-अल-अजहा के नाम से पहचाने जाने वाला यह त्योहार कुर्बानी, त्याग और इंसानियत का प्रतीक माना जाता है। भारत समेत कई देशों में मुस्लिम समुदाय इस पर्व को लेकर खास उत्साह और श्रद्धा के साथ इंतजार कर रहा है।

इस्लामिक मान्यता के अनुसार बकरीद हर वर्ष जिलहिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। माना जाता है कि यह पर्व हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने अल्लाह की राह में सबसे प्रिय चीज तक कुर्बान करने की तैयारी दिखाई थी। इसी त्याग और समर्पण की भावना को याद करते हुए मुस्लिम समुदाय ईद-अल-अजहा मनाता है।

धार्मिक जानकारों के अनुसार भारत में इस वर्ष बकरीद 28 मई को मनाई जा सकती है। हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि चांद दिखने के बाद ही की जाएगी।

बताया जा रहा है कि जिलहिज्जा महीने का चांद 27 मई के आसपास नजर आ सकता है। इसके बाद विभिन्न चांद कमेटियां आधिकारिक घोषणा करेंगी। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों में चांद देखने की परंपराएं अलग-अलग होने के कारण कई बार त्योहार की तारीखों में अंतर देखने को मिलता है। मौसम साफ रहने पर चांद आसानी से दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है।

बकरीद देश की प्रमुख सरकारी छुट्टियों में भी शामिल है। ऐसे में स्कूल, कॉलेज, बैंक और कई सरकारी कार्यालय बंद रह सकते हैं। विभिन्न राज्य सरकारें जल्द ही छुट्टियों की आधिकारिक सूची जारी कर सकती हैं। कई निजी कंपनियां भी इस अवसर पर कर्मचारियों को अवकाश देती हैं।

इस पर्व के दिन सुबह ईदगाहों और मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाती है। लोग नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं। इसके बाद कुर्बानी की रस्म निभाई जाती है और जरूरतमंदों के बीच मांस तथा भोजन बांटा जाता है। यही वजह है कि ईद-अल-अजहा को भाईचारे और इंसानियत का संदेश देने वाला त्योहार भी कहा जाता है।

बकरीद के मौके पर घरों में कई तरह के पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। बिरयानी, सेवइयां और अन्य खास व्यंजनों की खुशबू से घरों और मोहल्लों का माहौल उत्सवमय हो जाता है। सोशल मीडिया पर भी ईद मुबारक संदेश, तस्वीरें और शुभकामनाएं ट्रेंड करने लगती हैं।

धार्मिक विशेषज्ञ बताते हैं कि बकरीद और ईद-अल-अजहा दोनों एक ही पर्व के अलग-अलग नाम हैं। आम बोलचाल में इसे बकरीद कहा जाता है, जबकि धार्मिक रूप से इसे ईद-अल-अजहा के नाम से जाना जाता है।