उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता का कानून पारित करने वाला गुजरात दूसरा राज्य। जबरन विवाह पर सात साल तक जेल
नई दिल्ली : गुजरात में समान नागरिक संहिता लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को औपचारिक स्वीकृति दे दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब राज्य सरकार कानून के प्रावधानों को प्रभावी करने के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी।
उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता का कानून पारित करने वाला गुजरात देश का दूसरा राज्य बन गया है। हालांकि, इसके प्रावधान अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के सदस्यों पर लागू नहीं होंगे।
विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा था कि समान नागरिक संहिता उन प्रमुख सुधारों में शामिल है, जिन्हें लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इसे सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने वाला कदम बताते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के अनुरूप इससे महिलाओं के कानूनी अधिकार और सुरक्षा भी मजबूत होंगे।
कानून में सभी नागरिकों के विवाह और तलाक के औपचारिक पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। लिव-इन संबंधों का पंजीकरण भी जरूरी होगा और संबंध समाप्त होने पर इसकी सूचना प्रशासन को देनी होगी।
लिव-इन संबंध से जन्मे बच्चों को कानूनी रूप से वैध संतान माना जाएगा। यदि किसी महिला को उसका पार्टनर छोड़ देता है तो उसे गुजारा भत्ता पाने का कानूनी अधिकार भी मिलेगा।
कानून में एक से अधिक विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान है। दबाव या जोर-जबरदस्ती के जरिए विवाह कराने पर सात साल तक की जेल हो सकती है। सक्षम अदालत के आदेश के बिना अन्य तरीके से लिए गए तलाक को गैर-कानूनी मानते हुए तीन साल तक कारावास का प्रावधान किया गया है।
तलाकशुदा लोगों को किसी अनुचित शर्त के बिना दोबारा विवाह करने का अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही दोबारा विवाह के लिए हलाला जैसी प्रथाओं पर भी पूरी तरह रोक का प्रावधान किया गया है।
