अब अधिकारी मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा से कर रहे खिलवाड़, इस्तीफे के लिए टूट रहा है सब्र

प्रभात कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफे की तैयारी गृह विभाग ने शुरू कर दी है। भले ही बिहार के डिप्टी सीएम और गृह विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी की ओर से अब तक मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कोई बयान नहीं आया है, फिर भी उनके विभाग के एक नौकरशाह के. एस. अनुपम ने यह मान लिया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा केवल औपचारिकता भर है। तारीख चाहे जो भी हो, लेकिन नीतीश कुमार के पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पत्र जारी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने के बावजूद उनके ‘रिटायरमेंट’ की स्थिति जैसा संकेत देना गंभीर सवाल खड़े करता है। भले ही कुछ लोग इसे सामान्य प्रक्रिया मानें, लेकिन यह मुख्यमंत्री की गरिमा के साथ खिलवाड़ जैसा प्रतीत होता है और वह भी उनकी अपनी सरकार के एक अधिकारी के द्वारा।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि यह पत्र बिहार के भावी मुख्यमंत्री और वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के निर्देश पर जारी हुआ है या फिर वह स्वयं इससे अनभिज्ञ हैं। यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या यह पत्र भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विदाई की तैयारी का संकेत है या केवल प्रशासनिक औपचारिकता।

इस पूरे प्रकरण को लेकर जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने असहजता जरूर जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी छह महीने तक अपने पद पर बने रह सकते हैं और उनके इस्तीफे की कोई तय समय सीमा नहीं है।

श्रवण कुमार जनता दल यूनाइटेड के ऐसे नेता माने जाते हैं, जो राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के लिहाज से नीतीश कुमार के बाद प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वह समता पार्टी के संघर्ष से निकले हुए नेता हैं। हालांकि, उन्हें उनके सामाजिक आधार के बावजूद उतनी प्राथमिकता नहीं मिली, जिसके वह हकदार माने जाते रहे हैं। फिर भी कुर्मी समाज में उनकी मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता आज भी बनी हुई है।

वर्तमान परिस्थिति में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच एक तरह की बेचैनी देखी जा रही है। उनके पुराने सहयोगी भले कुछ हद तक नाराज नजर आते हों, लेकिन उन्हें अब भी श्रवण कुमार से उम्मीद है। आज पूरे बिहार में नीतीश समर्थकों की नजरें उन्हीं पर टिकी हैं कि वह इस स्थिति को स्पष्ट करें। खासकर कुर्मी समाज यह जानना चाहता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने के फैसले के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।

राजनीतिक हलकों में यह भी सवाल उठ रहा है कि ‘25 से 30 फिर से नीतीश’ जैसे नारे के कुछ ही महीनों बाद आखिर ऐसा क्या बदल गया कि मुख्यमंत्री से इस्तीफे को लेकर दबाव की चर्चा तेज हो गई है।

जिस तरह से भाजपा और राज्य सरकार के कुछ तंत्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मानो पदमुक्त मानकर उनकी सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर पत्र जारी कर रहे हैं, वह अपने आप में कई संकेत देता है। यह भी विचारणीय है कि यदि नीतीश कुमार अपनी इच्छा से इस्तीफा देकर राज्यसभा जा रहे हैं, तो इस पूरी प्रक्रिया का इस तरह प्रचार क्यों किया जा रहा है।

इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका भी चर्चा में है। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा की ओर से सीधे बयान न आने के बावजूद खबरें उसी दिशा में प्रवाहित हो रही हैं। वहीं, जनता दल यूनाइटेड के भीतर भी गतिविधियां तेज हैं। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा की सक्रियता इस मामले में लगातार चर्चा में बनी हुई है।

यह भी उल्लेखनीय है कि श्रवण कुमार का राजनीतिक योगदान और संघर्ष किसी भी बड़े नेता से कम नहीं रहा है। वह लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े रहे हैं और जमीन से जुड़े नेता के रूप में उनकी पहचान है।

वर्तमान में जनता दल यूनाइटेड के भीतर दो धाराएं स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। एक धारा भाजपा के साथ सामंजस्य बनाकर चलने वाले नेताओं की है, जबकि दूसरी धारा उससे असहज महसूस करने वालों की है। श्रवण कुमार इन दोनों के बीच संतुलन बनाते नजर आते हैं, लेकिन उनका सामाजिक आधार भाजपा समर्थक रुख को सहजता से स्वीकार नहीं कर रहा है।

ऐसी स्थिति में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर असमंजस और दबाव की स्थिति बनी हुई है, तब पार्टी के भीतर भी खींचतान बढ़ती दिख रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह को पार्टी में वापसी से रोकना और राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा को हाशिये पर डालने की कोशिशें भी इसी संदर्भ में देखी जा रही हैं।

इन तमाम परिस्थितियों के बीच श्रवण कुमार को ही एक ऐसी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, जो इस जटिल राजनीतिक स्थिति में संतुलन बना सकते हैं। फिलहाल, नीतीश कुमार के समर्थकों को यही उम्मीद है कि वह इस ‘डूबती नाव’ को संभालने में अहम भूमिका निभाएंगे।