रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोरी की कम से कम 70 घटनाओं का उल्लेख किया गया है
अयोध्या : राम मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और नकदी गिनने की प्रक्रिया में गंभीर कमियों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि सुरक्षा नियमों का समय पर पालन किया जाता तो इस तरह की चोरी की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता था।
एसआईटी के अनुसार, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच में चोरी की कम से कम 70 घटनाएं सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि नकदी गिनने की प्रक्रिया में तैनात कई कर्मचारियों और अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया, जिससे अनियमितताओं को बढ़ावा मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारियों की लापरवाही और कुछ कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा पूरे मामले की बड़ी वजह बना।
जांच में यह भी सामने आया कि दान पेटियों की चाबियां और वहां आने-जाने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को सौंप दी गई थी, जिनके पास कोई लिखित आदेश या अधिकृत अनुमति नहीं थी। रिपोर्ट में मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, जिसे पूर्व महासचिव चंपत राय का करीबी बताया गया है, का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही दान पेटियां खोलने और नकदी गिनने के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस पूरी व्यवस्था में बरती जा रही अनियमितताओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए।
एसआईटी ने सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था को भी बेहद कमजोर पाया। गिनती कक्ष में कैमरे तो लगाए गए थे, लेकिन ट्रस्ट का कोई भी कर्मचारी लाइव फुटेज की निगरानी नहीं कर रहा था। इतना ही नहीं, जहां नियमों के अनुसार सीसीटीवी फुटेज का 180 दिनों का बैकअप सुरक्षित रखा जाना चाहिए था, वहां केवल 27 अप्रैल से 6 जून तक यानी करीब 45 दिनों का रिकॉर्ड ही उपलब्ध मिला। इसी अवधि के फुटेज में चोरी की 70 घटनाएं दर्ज मिलीं। जांच टीम का मानना है कि चोरी का सिलसिला 27 अप्रैल से पहले भी चल रहा था, लेकिन पुराने वीडियो उपलब्ध नहीं होने के कारण कुल नुकसान का आकलन संभव नहीं है। फुटेज में कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले पैसे अपने कपड़ों, जेबों तथा जूतों में छिपाते दिखाई दिए हैं, जबकि कुछ अन्य कर्मचारी उन्हें छिपाने में सहयोग करते भी नजर आए।
रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई अन्य खामियों का भी उल्लेख किया गया है। कर्मचारियों की नियमित फ्रिस्किंग बंद कर दी गई थी, निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं कराया जा रहा था और निजी सामान के साथ गिनती कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जा रही थी। इसके अलावा किस दान पेटी से कितनी राशि निकली और किस मूल्य वर्ग के कितने नोट प्राप्त हुए, इसका अलग-अलग रिकॉर्ड भी नहीं रखा जा रहा था।
एसआईटी ने बताया कि सितंबर 2024 में लागू सुरक्षा नियमों के तहत कर्मचारियों की सख्त तलाशी अनिवार्य थी, लेकिन 6 फरवरी 2025 को जारी नई गाइडलाइन के बाद इस व्यवस्था को काफी हद तक शिथिल कर दिया गया। नए निर्देशों के अनुसार तलाशी केवल संदेह होने या आवश्यकता पड़ने पर ही ली जानी थी। जांच टीम ने सवाल उठाया है कि सुरक्षा मानकों में यह बदलाव किसके निर्देश पर किया गया। रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो इन नियमों के निर्माण के दौरान ट्रस्ट की ओर से जुड़े थे और जिनसे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की अपेक्षा थी।
जांच में यह भी सामने आया कि दान पेटियों, दान काउंटरों और सीधे गर्भगृह से प्राप्त चढ़ावे के प्रबंधन में भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियम यह था कि प्रत्येक दान पेटी की राशि अलग-अलग गिनी जाए और उसका अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाए, लेकिन वास्तविकता में कई मामलों में गिनती शुरू होने से पहले ही अलग-अलग दान पेटियों का पैसा एक साथ मिला दिया जाता था। एसआईटी ने इसे वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए गंभीर चूक माना है।
