बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर नया नियम लागू किया है
दीपक श्रीवास्तव
बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को लेकर एक अहम बदलाव किया है, जिसका सीधा असर उनके करियर विकल्पों पर पड़ने वाला है। नए आदेश के तहत अब कोई भी कर्मचारी अपनी सेवा अवधि के दौरान केवल एक ही बार प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो सकेगा। यह फैसला नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा लिया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत यदि कोई कर्मचारी एक से अधिक बार प्रतियोगी परीक्षा में बैठना चाहता है, तो उसे अपनी वर्तमान नौकरी से इस्तीफा देना होगा। नौकरी में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने की सुविधा अब समाप्त कर दी गई है। इस बदलाव को कर्मचारियों के लिए एक बड़ा प्रतिबंध माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके लिए अन्य अवसरों की तलाश करना कठिन हो सकता है।
हालांकि सरकार ने इस नियम में एक सीमित छूट भी दी है। कर्मचारियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति तभी मिलेगी, जब जिस पद के लिए वे आवेदन कर रहे हैं उसका वेतन स्तर उनके वर्तमान पद से अधिक हो। लेकिन इस स्थिति में भी उन्हें केवल एक ही अवसर दिया जाएगा।
इस फैसले के पीछे सरकार का तर्क है कि कर्मचारी बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उसमें शामिल होने के लिए छुट्टियां लेते हैं, जिससे सरकारी कार्य प्रभावित होते हैं। विभागीय कामकाज में बाधा और कार्यक्षमता में कमी को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले बिहार में सरकारी कर्मचारियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए अधिक स्वतंत्रता थी। वर्ष 2022 के नियमों के अनुसार, वे विभिन्न आयोगों की परीक्षाओं में अधिकतम पांच बार तक बैठ सकते थे। अब नए नियम के लागू होने से यह विकल्प काफी हद तक सीमित हो गया है।
इस नीति बदलाव को लेकर कर्मचारियों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां एक ओर इसे प्रशासनिक अनुशासन के लिहाज से जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे कर्मचारियों के अवसरों को सीमित करने वाला निर्णय भी माना जा रहा है।

