जिस सीट को भाजपा अपना सुरक्षित किला मानती रही, वहीं इस बार कांटे की टक्कर दिख रही है
पटना : बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए मतदान जारी है। मतदान की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी है। सुबह 11 बजे तक 20.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम बताया जा रहा है। इस विधानसभा क्षेत्र में 3.75 लाख से अधिक मतदाता हैं। 422 मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक मतदान होना है।
इस उपचुनाव में कुल 25 उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दो-तीन दिनों में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने भी सक्रिय प्रचार किया और मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश हुई। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा और जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर के बीच माना जा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा गुप्ता भी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन मतदान के रुझान से मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और जन सुराज के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है। मतदाताओं में उत्साह अपेक्षाकृत कम और खामोशी अधिक नजर आ रही है।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नितिन नवीन के इस्तीफे के कारण हो रहा है। नितिन नवीन लगातार पांच बार इस सीट से विधायक रहे हैं। उनसे पहले उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भी इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। यही वजह है कि बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
इसके बावजूद इस उपचुनाव में भाजपा ही नहीं, बल्कि पूरे एनडीए ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मंत्री, विधायक और संगठन के पदाधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करते रहे। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का संदेश भी डिजिटल माध्यमों से मतदाताओं तक पहुंचाया गया। भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) के कई वरिष्ठ नेताओं ने लगातार प्रचार किया। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, जदयू विधायक दल के नेता एवं मंत्री श्रवण कुमार तथा पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा सहित अनेक नेताओं ने चुनाव प्रचार में सक्रिय भागीदारी निभाई।
जिस सीट को भाजपा कभी लगभग सुरक्षित मानती रही, वहां इस बार कांटे का मुकाबला देखने को मिल रहा है। परिणाम 3 अगस्त को सामने आएंगे, लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस सीट को बचाने के लिए पूरे एनडीए को अपेक्षा से कहीं अधिक ताकत लगानी पड़ी। इसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी।
जिस तरह बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, एनडीए के सभी सहयोगी दलों और सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है, उसने इस उपचुनाव को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है।
इस पूरे परिदृश्य को देखकर सुदर्शन की प्रसिद्ध कहानी 'हार की जीत' की याद आती है। आज का राजनीतिक दौर भले ही आदर्शवाद से दूर हो, लेकिन इस चुनाव में यदि विपक्ष सीट नहीं भी जीतता है, तब भी उसने भाजपा को कड़ी चुनौती देकर राजनीतिक संदेश देने की स्थिति अवश्य बना ली है।