• शीर्ष अदालत ने कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती


नई दिल्ली : नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वह इस पूरे प्रकरण की जांच पर कुछ समय तक स्वयं निगरानी रखेगा। अदालत ने परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को फटकार लगाते हुए कहा कि जो कुछ हुआ है, वह देश के लाखों युवाओं के लिए बेहद निराशाजनक और दुखद है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।


जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह अलग से शपथपत्र दाखिल कर बताए कि नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संचालन को किस प्रकार पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और संस्थागत बनाया जाएगा। अदालत ने यह भी पूछा कि एनटीए को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए किस प्रकार मजबूत किया जाएगा और परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित योजना में यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति, विशेषज्ञों की व्यापक टीम और मजबूत प्रशासनिक ढांचे के माध्यम से एनटीए के भीतर स्थायी संस्थागत अनुभव और विशेषज्ञता कैसे विकसित की जाएगी। अदालत ने जोर देकर कहा कि परीक्षा संचालन जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी के लिए केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं।


पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि एनटीए के पास पर्याप्त भौतिक और बौद्धिक संसाधन होने चाहिए, ताकि वर्ष 2024 और 2026 में सामने आए नीट विवादों जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। अदालत ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मजबूत तकनीकी क्षमता, कुशल मानव संसाधन और प्रभावी निगरानी तंत्र अनिवार्य हैं।


सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एनटीए तथा इस मामले की समीक्षा के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन द्वारा दाखिल हलफनामों और जवाबों का संज्ञान लिया। इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार और एनटीए को अपनी विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया।


सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं आखिर कैसे हो रही हैं। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा होती हैं तो केवल जांच ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों को हरसंभव प्रयास करने होंगे।


केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखने और आवश्यक सुधार लागू करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इस मुद्दे पर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर बनाए हुए हैं और सरकार परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।


सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी और निगरानी को देशभर के लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अदालत के हस्तक्षेप से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।