न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई घटना को बताया चिंताजनक, समय पर कार्रवाई न करने पर प्रशासन को घेरा
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी के मामले ने सुप्रीम कोर्ट को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। अदालत ने इस घटना को न्याय व्यवस्था में हस्तक्षेप की गंभीर कोशिश बताते हुए राज्य प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ड्यूटी पर मौजूद न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक बिना पर्याप्त सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के छोड़ दिया गया। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि प्रशासनिक विफलता को भी उजागर करती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाएं न्याय व्यवस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।
कोर्ट ने राज्य के शीर्ष अधिकारियों से जवाब मांगा है कि पहले से सूचना होने के बावजूद समय पर सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई। साथ ही यह भी पूछा गया कि न्यायिक अधिकारियों को ऐसी असुरक्षित स्थिति में क्यों रहने दिया गया।
सबसे अहम निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत ने जोर देकर कहा कि संबंधित अधिकारियों को बिना किसी डर या दबाव के अपना कार्य करने दिया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना राज्य प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह संवेदनशील इलाकों में पर्याप्त केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित करे, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जहां आवश्यकता हो, वहां सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और हालात को नियंत्रित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं कानून के शासन पर सीधा हमला हैं और इन्हें किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब राज्य प्रशासन की जवाबदेही और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।