महज 48 घंटे में सामने आए 304 नए मामले, पिछले 24 घंटे में 166 मरीज मिले। सात दिनों में 835 से अधिक मामले बढ़े

नई दिल्ली : जिस फ्लू का जोर आमतौर पर नवंबर से जनवरी की सर्दियों में दिखाई देता है, उसने इस बार अगस्त में ही दिल्ली की चिंता बढ़ा दी है। स्वाइन फ्लू के संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज 48 घंटे में राजधानी में 304 नए मामले सामने आए हैं। इनमें 166 मरीज पिछले 24 घंटे में मिले हैं। इसके साथ ही इस वर्ष दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों की संख्या बढ़कर 2612 हो गई है, जबकि इन्फ्लुएंजा-ए के कुल मामले 3300 के पार पहुंच गए हैं। तेजी से बढ़ते आंकड़ों के बीच राहत की बात यह है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने वर्तमान में फैल रहे वायरस को कोई नया स्ट्रेन नहीं बताया है और अधिकांश मामलों को हल्का बताया है।

दिल्ली में पिछले एक सप्ताह के आंकड़े संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को और स्पष्ट करते हैं। 20 अगस्त तक राजधानी में स्वाइन फ्लू के 1777 मामले दर्ज किए गए थे। अब इनकी संख्या 2612 हो गई है। यानी सात दिनों में ही 835 से अधिक नए मामले सामने आए हैं। इसी अवधि में इन्फ्लुएंजा-ए के मामलों में भी बड़ी वृद्धि हुई है। 20 अगस्त तक इसके 2392 मामले थे, जिनमें एच1एन1 की संख्या 114 बताई गई थी। अब इन्फ्लुएंजा-ए के कुल मामलों की संख्या 3300 से अधिक हो चुकी है।

इस बार चिंता की एक वजह संक्रमण का समय भी है। सामान्य तौर पर इन्फ्लुएंजा नवंबर, दिसंबर और जनवरी के दौरान ज्यादा सक्रिय रहता है, लेकिन इस वर्ष अगस्त में ही मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में बढ़ी नमी और भीड़भाड़ वाली बंद जगहों पर लोगों के अधिक समय तक एक-दूसरे के संपर्क में रहने से वायरस को फैलने का अवसर मिल रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों और अधिक भीड़ वाले इलाकों में रहने वाले लोगों में संक्रमण का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक बताया जा रहा है।

हालांकि आईसीएमआर ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्कता बरतने को कहा है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के मुताबिक, वर्तमान में फैल रहा स्वाइन फ्लू वायरस कोई नया स्ट्रेन नहीं है। देश में जांच किए गए इन्फ्लुएंजा-ए के करीब 97 से 98 प्रतिशत मामलों में यही वायरस पाया जा रहा है। वायरस में समय के साथ छोटे आनुवंशिक बदलाव होते रहते हैं, लेकिन अभी संक्रमण में ऐसा कोई असामान्य स्वरूप सामने नहीं आया है, जिससे किसी बड़े प्रकोप की आशंका जताई जाए।

अधिकांश मरीजों में संक्रमण हल्का होने के बावजूद कुछ लोगों के लिए स्वाइन फ्लू गंभीर साबित हो सकता है। संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित कर गंभीर सांस संबंधी परेशानी पैदा कर सकता है। बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं। ऐसे लक्षण बढ़ने या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

फ्लू वैक्सीन भी संक्रमण और गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने में मददगार हो सकती है। इससे गंभीर संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने की आशंका घट सकती है। हालांकि आईसीएमआर ने सभी लोगों के लिए फ्लू वैक्सीन की सिफारिश नहीं की है। 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग और गंभीर पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीज चिकित्सक की सलाह के बाद वैक्सीन लगवाने पर विचार कर सकते हैं।

तेजी से बढ़ते मामलों के मद्देनजर दिल्ली के अस्पतालों को भी सतर्क कर दिया गया है। अस्पतालों को जरूरत के अनुसार आइसोलेशन बेड तैयार रखने के साथ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। ऑक्सीजन, जरूरी दवाओं और जांच सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग हालात पर लगातार नजर रख रहा है। आवश्यकता पड़ने पर अस्पतालों की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियों का जोर लोगों को भयभीत होने के बजाय लक्षणों को नजरअंदाज न करने और विशेष रूप से जोखिम वाले लोगों को सतर्क रखने पर है।