राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में होंगी मुख्य अतिथि। 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे

नई दिल्ली : भारत की सदियों पुरानी हथकरघा परंपरा को नई पहचान देने और बुनकरों की प्रतिभा का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान करने के लिए 7 अगस्त को राजधानी दिल्ली में भव्य आयोजन होगा। 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उत्कृष्ट कारीगरों और नवाचारकर्ताओं को देश के सर्वोच्च हथकरघा सम्मानों से सम्मानित करेंगी। यह समारोह न केवल भारत की समृद्ध बुनाई विरासत का उत्सव होगा, बल्कि लाखों बुनकरों के योगदान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित करने का भी अवसर बनेगा।

वस्त्र मंत्रालय की ओर से राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) में आयोजित होने वाले इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि होंगी। उनके हाथों वर्ष 2025 के 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। समारोह में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, वस्त्र राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा, वस्त्र सचिव नीलम शमी राव, विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना सहित सांसद, वरिष्ठ अधिकारी, मास्टर बुनकर, डिजाइनर, निर्यातक, कारीगर और देशभर से आए पुरस्कार विजेता शामिल होंगे।

इन पुरस्कारों के माध्यम से उत्कृष्ट बुनाई, नवाचार, डिजाइन विकास, विपणन पहल, स्टार्टअप उद्यमों और उत्पादक कंपनियों के उल्लेखनीय कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के हथकरघा विपणन सहायता घटक के अंतर्गत दिए जाने वाले ये सम्मान हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय पहचान माने जाते हैं।

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार को देश के हथकरघा बुनकरों का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार उन कारीगरों को दिया जाता है जिन्होंने अपने जीवन को भारतीय बुनाई परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित किया है। वहीं राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन बुनकरों और संबंधित संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने पारंपरिक शिल्प को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक तकनीक, रचनात्मकता, गुणवत्ता और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। पुरस्कार विजेताओं का चयन विशेषज्ञ समितियों की बहुस्तरीय और पारदर्शी प्रक्रिया के बाद किया जाता है।

समारोह के दौरान भारत की विविध हथकरघा परंपराओं को समर्पित चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही "अर्थ. रूट. थ्रेड – ऑल डाइड हैंडलूम टेक्सटाइल्स ऑफ सेंट्रल इंडिया" तथा "हैंडलूम अवार्ड्स बुक 2025" का विमोचन होगा। आगंतुकों के लिए पुरस्कार विजेता हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जबकि पारंपरिक कानी बुनाई और वॉल हैंगिंग बुनाई का लाइव प्रदर्शन भारतीय हस्तकला की समृद्ध विरासत से रूबरू कराएगा।

राष्ट्रीय समारोह के अलावा देशभर में प्रदर्शनियों, डिजाइनर सम्मेलनों, भारतीय हथकरघा एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईएचटी) के कार्यक्रमों तथा विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा, ताकि हथकरघा उत्पादों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके।

भारत का हथकरघा क्षेत्र आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ माना जाता है। यह क्षेत्र 35 लाख से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है, जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं। रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ यह क्षेत्र भारत की पारंपरिक वस्त्र विरासत को संरक्षित रखने और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन की ऐतिहासिक याद दिलाता है, जिसने भारतीय हथकरघा उद्योग को नई ऊर्जा प्रदान की थी। वर्ष 2015 से शुरू हुई इस परंपरा का उद्देश्य बुनकरों की कला, कौशल और समर्पण को सम्मान देना तथा देश की समृद्ध हथकरघा विरासत के संरक्षण और सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करना है।