अस्पताल में इलाज के दौरान मल्टी ऑर्गन फेलियर के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली

नई दिल्ली : भारतीय संगीत की दिग्गज हस्ती Asha Bhosle अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। बीती शाम अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार उनका निधन मल्टी ऑर्गन फेलियर के कारण हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि हालत गंभीर होने के बाद उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की गई, लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका। उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि परिवार और अस्पताल प्रशासन दोनों ने की।

गायिका के बेटे आनंद भोसले ने भी इस दुखद समाचार की पुष्टि करते हुए बताया कि अंतिम दर्शन के लिए उन्हें मुंबई के लोअर परेल स्थित उनके निवास पर रखा जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में किया जाएगा। इस खबर के सामने आते ही फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

बताया जा रहा है कि उन्हें हाल ही में सीने में संक्रमण की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार और प्रशंसक उनके जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उनका अचानक जाना सभी को गहरा आघात दे गया।

Asha Bhosle का जन्म 8 सितंबर 1933 को एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने करियर में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी और भारतीय सिनेमा को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया। सात दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने करीब 12 हजार से ज्यादा गाने गाए और 800 से अधिक फिल्मों में अपनी आवाज दी।

उनकी प्रतिभा और योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे अधिक गीत रिकॉर्ड करने वाली गायिका के रूप में दर्ज किया गया। इसके अलावा उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया।

महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित मंगेशकर परिवार में जन्मीं आशा भोसले, प्रसिद्ध गायिका Lata Mangeshkar की छोटी बहन थीं। संगीत उन्हें विरासत में मिला था और उन्होंने बहुत कम उम्र में ही फिल्मों में गाना शुरू कर दिया था। अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर से उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली, जिसने उनके गायन को गहराई और विविधता दी।

फिल्म चुनरिया से अपने करियर की शुरुआत करने वाली इस महान गायिका को सफलता पाने में समय जरूर लगा, लेकिन एक बार जो मुकाम उन्होंने हासिल किया, वह इतिहास बन गया। उनकी आवाज में हर भाव, हर रंग और हर दौर की झलक मिलती है।

आज उनके जाने के साथ भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है, लेकिन उनकी आवाज, उनके गीत और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।