उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल का हिस्टोपैथोलॉजी विभाग मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है

मुजफ्फरपुर : जिस विभाग पर कैंसर, ट्यूमर और अन्य गंभीर बीमारियों की सटीक पहचान की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है, वही विभाग आज खुद बुनियादी सुविधाओं के अभाव का शिकार है। उत्तर बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) का हिस्टोपैथोलॉजी विभाग वर्षों से संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेल रहा है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों की जिंदगी से जुड़ी महत्वपूर्ण जांचें प्रभावित होने लगी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

हिस्टोपैथोलॉजी विभाग किसी भी आधुनिक अस्पताल की रीढ़ माना जाता है। इसी प्रयोगशाला में मरीजों के शरीर से लिए गए टिश्यू के नमूनों की माइक्रोस्कोप से जांच कर यह तय किया जाता है कि मरीज कैंसर, ट्यूमर या किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित है या नहीं। डॉक्टरों के इलाज की दिशा और आगे की पूरी चिकित्सा प्रक्रिया काफी हद तक इसी जांच रिपोर्ट पर निर्भर करती है। ऐसे महत्वपूर्ण विभाग का बदहाल होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

विभाग का संचालन बेहद छोटे और संकीर्ण कमरों में किया जा रहा है। जगह की भारी कमी के कारण जांच के लिए आने वाले टिश्यू सैंपलों को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है। स्थिति यह है कि लैब के पैसेज में ही नमूनों को जैसे-तैसे रखा जा रहा है। इससे सैंपलों के कंटैमिनेशन, खराब होने अथवा गुम होने का खतरा लगातार बना रहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि नमूनों के रखरखाव में जरा भी चूक हुई तो जांच की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

इन दिनों विभाग की सबसे गंभीर समस्या ग्रॉसिंग वर्क स्टेशन पर पानी की आपूर्ति ठप होना है। यही वह स्थान है जहां जांच के लिए आए टिश्यू सैंपलों की प्रारंभिक प्रोसेसिंग की जाती है। पानी नहीं होने से कटिंग, वाशिंग और उपकरणों की नियमित सफाई का कार्य बाधित हो रहा है। इससे न केवल लैब की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, बल्कि जांच रिपोर्ट तैयार होने में भी देरी की आशंका बढ़ गई है।

हिस्टोपैथोलॉजी लैब में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों के नमूने जांच के लिए पहुंचते हैं। उत्तर बिहार के कई जिलों से आने वाले मरीजों की गंभीर बीमारियों की पुष्टि इसी विभाग के माध्यम से होती है। ऐसे में बुनियादी सुविधाओं का अभाव सीधे मरीजों की जांच प्रक्रिया और उपचार पर असर डाल रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हिस्टोपैथोलॉजी जैसी संवेदनशील प्रयोगशाला में पर्याप्त जगह, स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित सैंपल स्टोरेज और निर्बाध जलापूर्ति जैसी सुविधाएं अनिवार्य होती हैं। यदि इन कमियों को जल्द दूर नहीं किया गया तो भविष्य में मरीजों की जांच की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में जरूरत है कि अस्पताल प्रशासन इस विभाग की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर कर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए, ताकि गंभीर बीमारियों की जांच समय पर और पूरी गुणवत्ता के साथ हो सके।