हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने दूसरे कानूनी प्रावधानों के तहत नए टैरिफ लगाने की तैयारी भी शुरू कर दी है
वॉशिंगटन : दुनिया भर के देशों पर भारी आयात शुल्क लगाकर अमेरिकी उद्योगों को बढ़त दिलाने की ट्रंप प्रशासन की रणनीति अब उसी पर भारी पड़ गई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन को अब तक 100 अरब डॉलर (करीब 8.3 लाख करोड़ रुपये) आयातकों को लौटाने पड़े हैं। यह फैसला ट्रंप की व्यापारिक नीति के लिए अब तक का सबसे बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
वर्ष 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए कई देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था। प्रशासन का दावा था कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को एकतरफा व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। अदालत ने इन शुल्कों को अवैध ठहराते हुए पूरी राशि लौटाने का आदेश दिया।
अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट में दाखिल दस्तावेज बताते हैं कि 31 जुलाई तक कुल 166 अरब डॉलर का टैरिफ वसूला गया था। इसमें से लगभग 60 प्रतिशत, यानी 100 अरब डॉलर ब्याज सहित आयातकों को वापस किए जा चुके हैं। वहीं, अमेरिकी कस्टम्स के मुताबिक 128.68 अरब डॉलर तक के रिफंड दावे स्वीकार किए गए हैं, जिनमें से 100 अरब डॉलर के भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर राशि ट्रेजरी विभाग को भेज दी गई है।
हालांकि, इस रिफंड से आम अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पैसा सीधे आयात करने वाली कंपनियों को मिल रहा है और इसकी कोई गारंटी नहीं है कि वे इसका फायदा ग्राहकों तक कम कीमतों के रूप में पहुंचाएंगी।
दिलचस्प बात यह है कि इस बड़े कानूनी झटके के बावजूद ट्रंप प्रशासन पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा। IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ रद्द होने के बाद अब प्रशासन सेक्शन 301 समेत अन्य कानूनी प्रावधानों के जरिए चुनिंदा क्षेत्रों में नए आयात शुल्क लागू करने की तैयारी कर रहा है। इससे साफ है कि अमेरिका की सख्त व्यापार नीति आगे भी जारी रह सकती है।
