बुधवार को 25 मिनट के वर्चुअल संबोधन में पहली बार खोले देश छोड़ने के राज। बोलीं-जेल भेज दो, फांसी दे दो, फिर भी दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी
नई दिल्ली : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को करीब 25 मिनट के अपने पहले वर्चुअल संबोधन में दो साल की चुप्पी तोड़ते हुए कई बड़े खुलासे किए। अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल होने और देश छोड़ने के बाद यह पहली बार था, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से लोगों को संबोधित किया। सुरक्षा कारणों से पूरे संबोधन के दौरान कैमरा बंद रखा गया और केवल ऑडियो के माध्यम से ही उन्होंने अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने देश छोड़ने की परिस्थितियों, भारत के साथ रिश्तों, अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और दिसंबर 2026 में हर हाल में बांग्लादेश लौटने की घोषणा कर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी।
अपने संबोधन में शेख हसीना ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से बांग्लादेश नहीं छोड़ा था। जब प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे, तब उनके पास वहां से निकलने के लिए केवल 30 से 40 मिनट का समय था। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें यह तक नहीं पता था कि वह देश छोड़ने जा रही हैं। उनकी योजना अपने पैतृक गांव तुंगीपाड़ा जाने की थी, लेकिन हालात इतने तेजी से बदले कि उन्हें तत्काल बांग्लादेश छोड़ना पड़ा।
पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध, गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि झूठे मुकदमे, दिखावटी सुनवाई, जेल या फांसी की सजा उन्हें डरा नहीं सकती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर उन्हें जेल भेज दिया जाए या उनकी हत्या भी कर दी जाए, तब भी वह अपने देश लौटने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने दावा किया कि जनता का समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और उसी विश्वास के साथ वह दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी।
भारत के साथ संबंधों पर बोलते हुए शेख हसीना ने कहा कि भारत हमेशा बांग्लादेश का सच्चा मित्र रहा है। उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम, 1975 के संकट और वर्तमान हालात का जिक्र करते हुए कहा कि हर कठिन दौर में भारत ने बांग्लादेश का साथ दिया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चाहे भारत कितना भी करीबी मित्र क्यों न हो, आखिरकार उन्हें अपने लोगों और अपने देश के बीच ही लौटना है।
अपने संबोधन में उन्होंने मौजूदा बांग्लादेश की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से वह अपने देश को तकलीफ में देख रही हैं। आज लोगों के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर डर का माहौल है। उन्होंने कहा कि यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसे बनाने का सपना उन्होंने देखा था और न ही यह वह देश है, जिसके लिए 1971 में लाखों लोगों ने अपना बलिदान दिया था।
कैमरा बंद रखकर केवल ऑडियो के माध्यम से संबोधन करने के पीछे की वजह भी उन्होंने बताई। उनके अनुसार यदि वीडियो प्रसारित किया जाता तो उनकी लोकेशन, सुरक्षा व्यवस्था और आसपास की संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक हो सकती थी। साथ ही भारत और बांग्लादेश के बीच जारी कूटनीतिक तनाव तथा बांग्लादेश सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे प्रत्यर्पण के प्रयासों को देखते हुए भी यह निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और उन्हें रातोंरात देश छोड़कर भारत आना पड़ा था। प्रदर्शनकारियों पर दमन और हिंसा के आरोपों से जुड़े मामलों में बांग्लादेश की एक अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में उन्हें फांसी की सजा सुनाई है। इसके बाद से बांग्लादेश की सरकार लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। इन सभी कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद शेख हसीना ने बुधवार के अपने संबोधन में दोहराया कि वह हर हाल में दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी और अपने लोगों के बीच रहेंगी।
