सबसे ज्यादा मौत सिर में गंभीर चोट लगने से होती है, जब तक हेलमेट आदत नहीं बनेगा, तब तक सड़कें यूं ही परिवारों को उजाड़ती रहेंगी
अरुण शाही
सड़क पर दौड़ती हर बाइक सिर्फ एक वाहन नहीं होती, उसके साथ किसी परिवार की उम्मीदें, जिम्मेदारियां और सपने भी सफर कर रहे होते हैं। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आज भी बड़ी संख्या में लोग बाइक चलाते समय हेलमेट को अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि पुलिस चालान से बचने का साधन मानते हैं। यही वजह है कि शहर से लेकर गांव तक सड़कों पर ऐसे बाइक सवार आसानी से दिख जाते हैं, जिनके सिर पर हेलमेट नहीं होता, बल्कि वह हाथ में लटका रहता है या बाइक के हैंडल में टंगा दिखाई देता है। जैसे ही आगे पुलिस दिखती है, वे तुरंत हेलमेट पहन लेते हैं और पुलिस पार होते ही फिर उतार देते हैं। सवाल यह है कि क्या सड़क हादसे भी पुलिस देखकर होते हैं...?
हेलमेट किसी सरकारी नियम को पूरा करने की मजबूरी नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने वाला सुरक्षा कवच है। चिकित्सा विशेषज्ञों और सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि सड़क दुर्घटना के दौरान सिर पर लगने वाली चोटें मौत की सबसे बड़ी वजह बनती हैं। हेलमेट पहनने से गंभीर सिर की चोटों का खतरा 70 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाता है। यह मस्तिष्क को सुरक्षा देता है और हादसे के समय मौत की संभावना को काफी हद तक घटा देता है। इसके बावजूद लोग लापरवाही से बाज नहीं आ रहे।
भारत में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का एक बहुत बड़ा कारण हेलमेट न पहनना है। आंकड़ों के अनुसार, देश में हर दिन औसतन 80 लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली जाती है कि, क्योंकि क्योंकि वे दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट नहीं पहनते। इनमें से लगभग 70% बाइक चालक और 28% पीछे बैठने वाले यात्री होते हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, प्रतिवर्ष हेलमेट न पहनने के कारण लगभग 45 हजार से 47 हजार लोगों की दर्दनाक मौत हो जाती है। इनमें दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों का लगभग 30% से 35% हिस्सा केवल हेलमेट न लगाने वाली मौतों का होता है।
दरअसल, समस्या सिर्फ नियमों की नहीं, मानसिकता की भी है। हमारे यहां ट्रैफिक नियमों को सुरक्षा से ज्यादा बोझ समझा जाता है। बहुत से लोग मानते हैं कि “थोड़ी दूर ही जाना है” या “धीरे चला रहे हैं, क्या होगा?” लेकिन हादसे कभी बताकर नहीं आते। एक छोटी सी गलती, सामने वाले की लापरवाही या सड़क पर अचानक आई बाधा कुछ ही सेकंड में जिंदगी बदल सकती है। उस समय सिर पर मौजूद हेलमेट ही जीवन और मौत के बीच सबसे मजबूत दीवार बनता है।
पुलिस लगातार अभियान चलाती है, जुर्माना लगाती है और लोगों को जागरूक करने की कोशिश करती है। लेकिन केवल सख्ती से समस्या का समाधान संभव नहीं है। जरूरत इस बात की है कि समाज खुद सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर बने। माता-पिता अपने बच्चों को हेलमेट पहनने की आदत सिखाएं। दोस्त अपने दोस्तों को टोकें। परिवार का हर सदस्य इस बात पर जोर दे कि बाइक स्टार्ट करने से पहले हेलमेट जरूर पहना जाए।
यह भी जरूरी है कि लोग केवल नाम के लिए नहीं, बल्कि सही तरीके से हेलमेट पहनें। कई लोग सस्ता और कमजोर हेलमेट खरीद लेते हैं, जो हादसे के समय कोई सुरक्षा नहीं दे पाता। अच्छी गुणवत्ता वाला हेलमेट और उसे ठीक से बांधकर पहनना उतना ही जरूरी है जितना बाइक चलाना।
हर सड़क हादसे के बाद जब किसी घर में मातम छाता है, तब परिवार यही सोचता है कि काश हेलमेट पहना होता। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसलिए अब समय आ गया है कि हेलमेट को जुर्माने से बचने की मजबूरी नहीं, बल्कि अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी समझा जाए। क्योंकि घर लौटने का इंतजार सिर्फ आपको नहीं, आपके अपनों को भी रहता है।