देशभर के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से पूरे सभागार को देर तक बांधे रखा
पटना : शब्दों की संवेदना, मातृभाषा का गौरव और साहित्य की सृजनशील ऊर्जा जब एक मंच पर एकत्र हुई तो पटना संग्रहालय का वातावरण कविता और संस्कृति के रंगों से सराबोर हो उठा। बज्जिका भाषा की मिठास, हिंदी साहित्य की गरिमा और रचनाकारों की सशक्त अभिव्यक्तियों ने उपस्थित श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार तथा 'सामयिक परिवेश' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 11वें आदिशक्ति प्रेमनाथ खन्ना तीन दिवसीय समारोह के अंतर्गत बज्जिका पुस्तक लोकार्पण, भव्य बज्जिका कवि सम्मेलन, पत्रिका विमोचन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, कवियों, बुद्धिजीवियों और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही। आयोजन के दौरान साहित्यिक वातावरण अपने चरम पर दिखाई दिया और विभिन्न विधाओं की रचनाओं ने श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की।
समारोह की मुख्य अतिथि एवं 'सामयिक परिवेश' की संस्थापक ममता मेहरोत्रा ने कहा कि अपने पिता की स्मृति में आयोजित यह आयोजन उनके लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा एक सांस्कृतिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि कविता समाज की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ज्वालासांध्य पुष्प ने की। उन्होंने बज्जिका भाषा के संरक्षण और विकास पर बल देते हुए कहा कि किसी भी भाषा को जीवंत बनाए रखने के लिए उसमें लगातार सृजन होना आवश्यक है। उन्होंने साहित्यकारों से अपनी मातृभाषा में अधिकाधिक लेखन करने का आह्वान किया, ताकि बज्जिका को व्यापक पहचान मिल सके।
पूरे कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन हिंदी और बज्जिका की चर्चित लेखिका सविता राज ने किया। उनके प्रभावशाली संचालन ने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित बनाए रखा और श्रोताओं की रुचि अंतिम क्षण तक बनी रही।
कवि सम्मेलन में देशभर से आए प्रतिष्ठित कवियों ने समाज, मानवीय संवेदनाओं, राष्ट्रभक्ति, नारी शक्ति और जीवन मूल्यों से जुड़ी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। कविताओं में कहीं संवेदनाओं की गहराई दिखाई दी तो कहीं सामाजिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार। श्रोताओं ने हर प्रस्तुति का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया और पूरा सभागार साहित्यिक ऊर्जा से गूंजता रहा।
इस अवसर पर 'सामयिक परिवेश' पत्रिका का विधिवत विमोचन भी किया गया। साथ ही साहित्य, कला एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित कर उनके कार्यों की सराहना की गई।
कार्यक्रम में ज्वालासांध्य पुष्प, अमिताभ कुमार सिन्हा, ममता मेहरोत्रा, मणिभूषण प्रसाद सिंह 'अकेला', जनार्दन मिश्रा, सविता राज, ब्रजेश राणा, नंद किशोर साहु, आभा अनुरंजिता, डॉ. विद्या चौधरी, सुरेश वर्मा, मुकेश कुमार मृदुल, अवधेश त्रिषित, पुष्पा गुप्ता, आशीष अकिंचन, दिनेश कुमार सिन्हा, अखौरी चन्द्रशेखर, ज्योति सिन्हा और रूपम सिन्हा सहित अनेक प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के अंत में अशोक कुमार सिन्हा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।