प्रधानमंत्री की अपील के बाद फिर चर्चा में आया हाइब्रिड और रिमोट वर्क कल्चर
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुआ वर्क फ्रॉम होम अब केवल आपातकालीन व्यवस्था नहीं रह गया है, बल्कि धीरे-धीरे भारत की नई कार्य संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है। खासकर आईटी कंपनियों, स्टार्टअप्स और डिजिटल सेक्टर में घर से काम करने का चलन लगातार मजबूत हो रहा है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद इस विषय पर देशभर में नई बहस शुरू हो गई है।
प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे देश पर बढ़ रहे आर्थिक दबाव को कम करने के लिए अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाएं। उन्होंने कोविड काल के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग्स और वर्चुअल कॉन्फ्रेंस जैसे तरीकों को फिर से बढ़ावा देने की बात कही। उनका कहना है कि इससे यात्रा कम होगी, ईंधन की बचत होगी और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा।
देश में इस समय बड़ी संख्या में कर्मचारी हाइब्रिड मॉडल पर काम कर रहे हैं। आईटी उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार बड़ी टेक कंपनियों में अब भी अधिकांश कर्मचारी सप्ताह के कुछ दिन घर से और कुछ दिन ऑफिस से काम कर रहे हैं। वहीं कई स्टार्टअप कंपनियों ने पूरी तरह रिमोट वर्क मॉडल अपना लिया है, जहां कर्मचारी अपने शहरों या घरों से ही काम कर रहे हैं।
वर्क फ्रॉम होम का सबसे बड़ा फायदा कर्मचारियों को आर्थिक रूप से मिल रहा है। महानगरों में रहने वाले कर्मचारी हर महीने यात्रा, बाहर खाने और अन्य दैनिक खर्चों में बड़ी बचत कर रहे हैं। इसके अलावा ट्रैफिक में घंटों बर्बाद होने वाला समय भी बच रहा है, जिससे लोगों के निजी जीवन और काम के बीच बेहतर संतुलन बन रहा है।
दूसरी ओर कंपनियों को भी इस मॉडल से भारी राहत मिली है। कई बड़ी कंपनियों ने पाया है कि घर से काम की व्यवस्था लागू होने के बाद उनके संचालन खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है। बड़े ऑफिस स्पेस, बिजली, रखरखाव और अन्य सुविधाओं पर होने वाला खर्च कम हुआ है। यही कारण है कि कई कंपनियां अब स्थायी रूप से हाइब्रिड मॉडल को अपनाने लगी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कम यात्रा होने से ईंधन की खपत घटती है और प्रदूषण भी कम होता है। सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग और डिजिटल बैठकों को बढ़ावा देने से शहरों में ट्रैफिक दबाव कम किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से विदेशी यात्राओं और डेस्टिनेशन वेडिंग जैसे खर्चों से फिलहाल बचने की अपील भी की है। उनका कहना है कि इससे विदेशी मुद्रा का अनावश्यक बहिर्गमन कम होगा और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बहुत जरूरी न हो तो एक वर्ष तक सोने की खरीदारी से भी बचना चाहिए, क्योंकि बड़ी मात्रा में सोना आयात करने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल-गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में भारी उछाल आया है। ऐसे में भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। माना जा रहा है कि इसी आर्थिक दबाव को कम करने के लिए सरकार लोगों से ऊर्जा बचत और खर्च में संयम बरतने की अपील कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत में वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड वर्क मॉडल और तेजी से बढ़ सकता है। बदलती तकनीक, डिजिटल कनेक्टिविटी और आर्थिक जरूरतों के बीच यह मॉडल अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि नई कार्य व्यवस्था के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।
