अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास से 50 हजार रुपये का जमानती बॉन्ड भरवाया गया, शर्तों का उल्लंघन करने पर बढ़ सकती हैं कानूनी मुश्किलें
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत से रिहाई मिल गई। हालांकि, तीनों को अगले एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त का पालन करना होगा। अदालत ने उनसे 50 हजार रुपये का जमानती बॉन्ड और एक वर्ष के लिए शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरवाया है। इस अवधि में शांति भंग होने या बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। करीब 24 घंटे हिरासत में रहने के बाद मिली रिहाई को सीजेपी ने अपनी जीत बताया है।
सीजेपी ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसमें शामिल होने के लिए पार्टी के तीनों प्रमुख नेता मुंबई से विमान के जरिए दिल्ली पहुंचे थे। आरोप है कि विमान के दिल्ली पहुंचते ही पुलिस की टीम ने उन्हें फ्लाइट से ही हिरासत में ले लिया। इसके बाद तीनों के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की गई।
सीजेपी का दावा है कि हिरासत में लिए गए करीब सात हजार प्रदर्शनकारियों को देर रात तक रिहा कर दिया गया, लेकिन दीपके, रांका और दास को नहीं छोड़ा गया। रविवार को तीनों को दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। वहां जमानती बॉन्ड और शांति बनाए रखने संबंधी बॉन्ड भरने सहित आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनकी रिहाई का आदेश दिया गया।
रिहाई के साथ लगाई गई शर्तों का पालन तीनों नेताओं के लिए जरूरी होगा। अदालत ने उन्हें शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की हिदायत दी है, जिनसे सार्वजनिक अशांति फैल सकती है। हालांकि, शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने का अर्थ शांतिपूर्ण सभा या प्रदर्शन के अधिकार पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।
सीजेपी की लीगल अफेयर्स प्रमुख रत्ना सिंह के अनुसार, तीनों नेताओं को एक वर्ष तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर छोड़ा गया है। इस दौरान बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन होने पर उनके सामने नई कानूनी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
रिहाई के बाद सीजेपी ने सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने करीब 24 घंटे की हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए दावा किया कि आखिरकार पुलिस को तीनों नेताओं को छोड़ना पड़ा। सीजेपी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'कॉकरोच कभी नहीं मरते।' हालांकि, कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर बाहर निकलने पर तीनों नेताओं के स्वागत के लिए वहां कोई मौजूद नहीं था।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई को नियमानुसार बताया है। पुलिस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि तीनों नेताओं को एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और उन्हें दिल्ली कैंट की कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट को विश्वसनीय सूचना के आधार पर ऐसे व्यक्ति के खिलाफ शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाने की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार है, जिससे शांति भंग होने या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। इस प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।
वहीं, बीएनएसएस की धारा 170 पुलिस को संज्ञेय अपराध रोकने के लिए कुछ परिस्थितियों में बिना वारंट गिरफ्तारी की अनुमति देती है। इसका इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब पुलिस को किसी संज्ञेय अपराध की योजना की जानकारी हो और उसे अन्य तरीके से रोकना संभव न हो। ऐसी गिरफ्तारी भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और समयसीमा के अधीन होती है।
