मुजफ्फरपुर में बज्जिका फिल्म 'बउआ' का भव्य मुहूर्त संपन्न। साहित्य, संगीत और सिनेमा के संगम ने रचा सांस्कृतिक उल्लास का नया अध्याय

मुजफ्फरपुर : बिहार की सांस्कृतिक राजधानी मुजफ्फरपुर ने बज्जिका भाषा में फिल्म बनाने का सपना साकार कर दिया। बज्जिका फिल्म 'बउआ' का भव्य मुहूर्त बिहार राज्य के गौरवशाली एवं विशाल फिल्म स्टूडियो वसंत पैलेस के पार्क में संपन्न हुआ। दीप प्रज्ज्वलन के साथ फिल्म का विधिवत शुभारंभ हुआ और इसी के साथ फिल्म निर्माण का कार्य भी औपचारिक रूप से प्रारंभ हो गया।

मुहूर्त समारोह में बज्जिकांचल के सशक्त हस्ताक्षर सुबोध राय, बसंत कुमार, फिल्म के पटकथा लेखक एवं सह-निर्देशक अभिकान्त, डीओपी एवं सह-निर्देशक रौनित रंजन, साहित्य मार्तण्ड उदय नारायण सिंह, अभिनेता नीतीश कुमार, सहायक अभिनेत्री संगीता कुमारी तथा रूबी कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर फिल्म की सफलता की कामना की।

फिल्म का संगीत मुजफ्फरपुर की धरती से निकलकर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. अश्वनी कुमार ने दिया है। वहीं फिल्म के गीतों को मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध गायक ऐश्वर्य निगम तथा मुजफ्फरपुर की बहू और चर्चित गायिका दीपाली सहाय ने अपनी मधुर आवाज दी है। गीतों की रचना डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. अजीत पांडे तथा बसंत कुमार बचपन ने की है।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में सुबोध राय ने कहा कि बज्जिका भाषा में फिल्म का निर्माण एक ऐतिहासिक कदम है। इससे बज्जिका भाषा को नई मजबूती मिलेगी और इसकी सांस्कृतिक पहचान को व्यापक विस्तार प्राप्त होगा।

बसंत कुमार बचपन ने कहा कि सुखद वातावरण में 'बउआ' का मुहूर्त संपन्न होना इस बात का संकेत है कि फिल्म शीघ्र पूरी होगी और दर्शकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फिल्म बज्जिका भाषा और संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

फिल्म के पटकथा लेखक एवं सह-निर्देशक अभिकान्त ने फिल्म की संक्षिप्त किंतु सारगर्भित कहानी सुनाई, जिसका उपस्थित लोगों ने जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया। कहानी की प्रस्तुति ने दर्शकों के मन में फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी।

मुख्य अतिथि साहित्य मार्तण्ड उदय नारायण सिंह, जिन्होंने फिल्म के संवादों का बज्जिका में अनुवाद किया है, ने कहा कि 'बउआ' का निर्माण इस बात का प्रमाण है कि अब वह दिन दूर नहीं जब बज्जिका भाषा भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल होगी और हम गर्व से कह सकेंगे कि हम बज्जिका भाषी हैं।

इस अवसर पर फिल्म से जुड़े रौनित कुमार, आलोक कुमार, विवेक कुमार, कृष्णा सिंह सांवरिया, रवि कुमार, सत्येंद्र, अनुज कुमार, कविता, रूबी, मिहिर झा, आनंद कुमार तथा अरुण कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए और फिल्म को बज्जिकांचल की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

वसंत पैलेस को 'बउआ' फिल्म के ऐतिहासिक मुहूर्त का साक्षी बनने का सौभाग्य मिला, जहां मुजफ्फरपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे शताधिक कला प्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पूरा वातावरण बज्जिका भाषा, लोकसंस्कृति और अपनी मिट्टी की सुगंध से सराबोर दिखाई दिया।

अंत में संगीता कुमारी ने सभी अतिथियों, कलाकारों, साहित्यकारों और उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

'बउआ' का यह मुहूर्त केवल एक फिल्म की शुरुआत नहीं, बल्कि बज्जिका भाषा, साहित्य और संस्कृति के स्वर्णिम भविष्य की नई पटकथा का शुभारंभ माना जा रहा है। यह फिल्म उस सपने को साकार करने की दिशा में पहला सशक्त कदम है, जिसके माध्यम से बज्जिका की लोकगाथाएं, संवेदनाएं और सांस्कृतिक विरासत अब बड़े पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाने को तैयार हैं।