विभागों का त्वरित बंटवारा और अफसरों को सख्त संदेश
दीपक श्रीवास्तव
बिहार की राजनीति ने बुधवार को एक ऐतिहासिक मोड़ लिया, जब भारतीय जनता पार्टी के नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पटना के लोकभवन स्थित राजेंद्र मंडपम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। पहली बार भाजपा का कोई नेता बिहार के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा है, जिससे पार्टी के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि बन गई है।
शपथ के साथ ही सरकार की नई संरचना भी सामने आ गई। जनता दल यूनाइटेड के विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। सम्राट चौधरी का यह सफर भी विशेष रहा, क्योंकि वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए जिन्होंने उपमुख्यमंत्री से सीधे मुख्यमंत्री पद तक का रास्ता तय किया। दशकों पहले कर्पूरी ठाकुर ने भी इसी तरह का सफर तय कर एक मिसाल कायम की थी और अब सम्राट चौधरी ने उस इतिहास को दोहराया है।
सम्राट के नई सरकार की तेज शुरुआत
नई सरकार की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज शुरुआत रही। शपथ लेने के तुरंत बाद ही सम्राट चौधरी सचिवालय पहुंचे और कार्यभार संभालते ही अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट कर दिया कि उनका कार्यकाल सुस्ती या औपचारिकताओं के लिए नहीं होगा। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि फाइलों को लटकाना, अनावश्यक प्रक्रिया बढ़ाना या केवल कागजी खानापूरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि ऊपर से नीचे तक किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा और हर विभाग को जवाबदेह बनना होगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी चल रही परियोजनाओं की समीक्षा कर उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि काम की गति दोगुनी की जाए और अनावश्यक पत्राचार की प्रवृत्ति को खत्म किया जाए। जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर स्तर पर लोगों की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
शपथ के बाद नीतीश कुमार के आवास पहुंचे सम्राट
राजनीतिक संतुलन का संकेत देते हुए सम्राट चौधरी ने शपथ के बाद पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात भी की। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास, सुशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनसे मार्गदर्शन लिया। इसे नई सरकार के लिए संवाद और अनुभव के समन्वय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में उत्साह की झलक
वहीं, भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित अभिनंदन समारोह में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया, जिससे संगठन का उत्साह भी साफ झलकता दिखा।
मुख्यमंत्री सम्राट के पास गृह सहित 29 विभाग
शपथ के कुछ ही घंटों के भीतर, शाम होते-होते सरकार ने विभागों का विस्तृत बंटवारा कर प्रशासनिक दिशा भी तय कर दी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पास कुल 29 विभाग रखे, जिनमें सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन, राजस्व एवं भूमि सुधार, खान एवं भू-तत्व, नगर विकास एवं आवास, स्वास्थ्य, विधि, उद्योग, पथ निर्माण, कृषि, लघु जल संसाधन, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण, युवा, रोजगार एवं कौशल विकास, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन, आपदा प्रबंधन, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण, सूचना प्रौद्योगिकी, खेल, सहकारिता, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, गन्ना उद्योग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण और पंचायती राज जैसे अहम विभाग शामिल हैं। इसके अलावा, वे सभी विभाग भी उनके पास रहेंगे जिन्हें किसी अन्य को आवंटित नहीं किया गया है। खास तौर पर गृह विभाग को अपने पास रखना उनकी प्रशासनिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है।
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी के पास 10 विभाग
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी को 10 विभाग सौंपे गए हैं, जिनमें जल संसाधन, संसदीय कार्य, सूचना एवं जनसंपर्क, भवन निर्माण, अल्पसंख्यक कल्याण, शिक्षा, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण विकास, परिवहन और उच्च शिक्षा जैसे प्रमुख विभाग शामिल हैं।
उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को 8 विभागों की जिम्मेदारी
वहीं, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को 8 विभागों की जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें ऊर्जा, योजना एवं विकास, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन, वित्त, वाणिज्य-कर, समाज कल्याण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण और ग्रामीण कार्य विभाग शामिल हैं।
सम्राट की यह तेज शुरुआत कितना कारगर होगी
पहले ही दिन जिस तरह की सक्रियता, सख्ती और त्वरित निर्णय देखने को मिले हैं, उससे यह साफ हो गया है कि सम्राट चौधरी प्रशासन को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के इरादे से मैदान में उतरे हैं। सबके मन में सवाल कौंध रहा हैं और नजर इस बात पर टिकी है कि सम्राट की यह तेज शुरुआत कितना कारगर होगी और बिहार के विकास की रफ्तार को कितना आगे बढ़ा पाती है और जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।