नितिन नबीन ने साफ कहा-मुख्यमंत्री को लेकर गठबंधन में कोई मतभेद नहीं

दीपक श्रीवास्तव

बिहार की राजनीति इन दिनों एक नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर किसी तरह का मतभेद नहीं है। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया एक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ रही है और सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीतीश कुमार के हालिया फैसलों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

नीतीश कुमार, जो बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं, ने हाल ही में विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देकर एक बड़ा संकेत दिया। इसके बाद उनका राज्यसभा के लिए चुना जाना और 10 अप्रैल को शपथ लेने की तैयारी, इस बात की ओर इशारा करती है कि राज्य की राजनीति में एक नई संरचना आकार ले सकती है। 75 वर्षीय इस अनुभवी नेता का हर कदम केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि गठबंधन की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

नितिन नबीन ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि भाजपा हमेशा गठबंधन धर्म का पालन करती आई है। उनके अनुसार, यही वजह है कि सहयोगी दल भाजपा पर भरोसा करते हैं और आज भी NDA मजबूत स्थिति में खड़ा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी फैसले नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लिए जा रहे हैं, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि नेतृत्व को लेकर कोई असमंजस नहीं है।

वहीं, विपक्ष पर भी भाजपा ने तीखा हमला बोला है। नितिन नवीन ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और कांग्रेस परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष जमीन पर मजबूत चुनौती पेश करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की राजनीति अब केवल बयानबाजी और तुष्टीकरण तक सीमित हो गई है, जबकि उसका जनाधार कमजोर पड़ चुका है। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर की पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस के संवाद और सोच में गिरावट साफ दिखाई दे रही है।

बिहार की राजनीति में यह दौर केवल पद और सत्ता का नहीं, बल्कि रणनीति और संतुलन का भी है। एक ओर नीतीश कुमार का अनुभव और उनकी भूमिका है, तो दूसरी ओर भाजपा का संगठनात्मक आत्मविश्वास। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह संतुलन किस दिशा में जाता है।

फिलहाल, NDA यह संदेश देने में सफल दिख रहा है कि सब कुछ नियंत्रण में है। लेकिन राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और बिहार इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहा है। आने वाला समय ही तय करेगा कि यह स्थिरता कायम रहती है या फिर सियासत कोई नया मोड़ लेती है।