राजस्थान को किसान क्रेडिट कार्ड पर विशेष ध्यान देने की सलाह

नई दिल्ली : खेतों तक योजनाओं का पैसा समय पर पहुंचे, किसानों को आसानी से कर्ज मिले और तकनीक के जरिए सरकारी सुविधाओं को ज्यादा पारदर्शी बनाया जाए-इन्हीं तीन मोर्चों पर केंद्र सरकार ने राजस्थान और तेलंगाना के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दोनों राज्यों के लिए 605 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति दी है। इसमें राजस्थान को 340.59 करोड़ रुपये और तेलंगाना को 265.12 करोड़ रुपये मिलेंगे। यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के तहत जारी की जा रही है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल से राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव के साथ वर्चुअल बैठक की। इस दौरान दोनों राज्यों में चल रही कृषि योजनाओं, अब तक हुए खर्च और किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सचिव अतीश चंद्रा समेत केंद्र और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

दोनों राज्यों के लिए राशि जारी करने से पहले वार्षिक कार्ययोजनाओं और पहले जारी की गई धनराशि के उपयोग की स्थिति का आकलन किया गया। राज्यों की PAC बैठकों में स्वीकृत योजनाओं, प्रथम मदर सैंक्शन के इस्तेमाल और अब तक हुए व्यय की समीक्षा के आधार पर नई वित्तीय स्वीकृतियां दी गई हैं।

राजस्थान के लिए 20 अप्रैल 2026 को हुई PAC की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 849.37 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई थी। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 509.62 करोड़ रुपये निर्धारित की गई। इसके बाद चार मई को 216.13 करोड़ रुपये की प्रथम मदर सैंक्शन जारी की गई थी।

राजस्थान सरकार अब तक इस राशि में से 164.39 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, जो प्रथम मदर सैंक्शन का 76.06 प्रतिशत है। खर्च की प्रगति को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री की स्वीकृति के बाद अब राजस्थान को RKVY के तहत 216.12 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना के तहत 124.47 करोड़ रुपये जारी किए जा रहे हैं। इस तरह राजस्थान को कुल 340.59 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी।

तेलंगाना के लिए 27 अप्रैल 2026 को PAC की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 651.06 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई थी। इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 390.63 करोड़ रुपये है। इसके बाद 12 मई को तेलंगाना के लिए 157.65 करोड़ रुपये की प्रथम मदर सैंक्शन जारी की गई थी।

तेलंगाना ने अब तक इसमें से 96.05 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह प्रथम मदर सैंक्शन का 60.93 प्रतिशत है। प्रगति की समीक्षा के बाद अब राज्य को RKVY के तहत 157.66 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना के तहत 107.46 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई है। दोनों मदों को मिलाकर तेलंगाना को कुल 265.12 करोड़ रुपये मिलेंगे।

बैठक में तेलंगाना के फॉर्मर आईडी और उर्वरक वितरण के नए मॉडल ने केंद्रीय कृषि मंत्री का विशेष ध्यान खींचा। शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल की सराहना करते हुए तेलंगाना के कृषि मंत्री को बधाई दी। उन्होंने माना कि इस तरह की व्यवस्था किसानों तक सरकारी सेवाओं और सुविधाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाने में मददगार साबित हो सकती है।

हालांकि तेलंगाना में तिलहन और दलहन मिशनों के तहत खर्च की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी पाई गई। केंद्रीय मंत्री ने राज्य को इन मिशनों के क्रियान्वयन और खर्च की नियमित निगरानी करने की आवश्यकता बताई, ताकि स्वीकृत योजनाओं का लाभ समय पर किसानों तक पहुंच सके।

राजस्थान को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC की स्थिति पर विशेष ध्यान देने को कहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसानों को समय पर और आसानी से ऋण सहायता उपलब्ध हो। उन्होंने राजस्थान सरकार को राज्य में कृषि के समग्र विकास के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वित्तीय स्वीकृतियों का उद्देश्य केवल राज्यों को राशि उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कृषि योजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर किसानों के हित में संसाधन, तकनीकी सहायता और योजनाओं की निगरानी व्यवस्था को मजबूत कर रही है।