शुरुआती नतीजों में बड़ा उलटफेर दिख रहा है

सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है और 163 सीटों पर बढ़त के साथ सत्ता के करीब पहुंचती नजर आ रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस 116 सीटों पर आगे है, जबकि अन्य दल बेहद सीमित दायरे में सिमटे हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भवानीपुर सीट से पीछे चल रही हैं, जिसने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

इस बार का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के लंबे राजनीतिक सफर की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है। पिछले 15 वर्षों से राज्य की सत्ता पर काबिज टीएमसी के लिए यह चुनाव जनमत संग्रह जैसा माना जा रहा है। अगर पार्टी वापसी करती है तो ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में और मजबूत दावेदारी पेश कर सकती हैं, लेकिन मौजूदा रुझान उनके लिए चुनौतीपूर्ण संकेत दे रहे हैं।

राज्य की 294 विधानसभा सीटों में कई हाई प्रोफाइल सीटों पर खास नजर बनी हुई है। भवानीपुर, नंदीग्राम, टॉलीगंज, सिंगूर, खड़गपुर सदर, सिलीगुड़ी और बैरकपुर जैसी सीटों पर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। खासतौर पर भवानीपुर, जहां ममता बनर्जी मैदान में हैं, इस चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।

इस चुनाव की एक और खास बात रिकॉर्ड मतदान रहा। दो चरणों में हुए मतदान में कुल 92 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा है। इतना बड़ा मतदान प्रतिशत इस बात का संकेत देता है कि जनता बदलाव या समर्थन के लिए पूरी ताकत से सामने आई है, जिसका असर अब नतीजों में साफ दिख रहा है।

बंगाल की राजनीति का इतिहास भी इस मुकाबले को और अहम बना देता है। कभी कांग्रेस का गढ़ रहे इस राज्य में 1977 से लेकर तीन दशकों तक वाम मोर्चा का दबदबा रहा। ज्योति बसु और बाद में बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व में वाम दलों ने लंबा शासन किया। 2011 में ममता बनर्जी ने इस किले को ध्वस्त कर सत्ता हासिल की और तब से लगातार तीन चुनाव जीतती आई हैं।

लेकिन केंद्र में भाजपा की मजबूत स्थिति के बाद बंगाल की राजनीति का समीकरण तेजी से बदला है। धीरे-धीरे भाजपा ने खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित किया और कांग्रेस तथा वाम दल हाशिए पर चले गए। यही वजह है कि इस बार मुकाबला सीधे भाजपा और टीएमसी के बीच सिमट गया है।