दो-तिहाई समर्थन के दावे के साथ नए राजनीतिक समीकरण की चर्चा तेज
सेंट्रल डेस्क, नई दिल्ली
राज्यसभा में शुक्रवार को उस समय बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने पाला बदलने का दावा करते हुए भारतीय जनता पार्टी में विलय की बात कही। इस घटनाक्रम ने संसद के भीतर और बाहर सियासी हलचल को तेज कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, सांसदों का कहना है कि उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत यह कदम उठाया है, जिससे दल-बदल विरोधी कानून के बावजूद उनकी सदस्यता सुरक्षित रह सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि दो-तिहाई सांसद किसी दूसरे दल में विलय का समर्थन करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से बचाव मिल जाता है।
इस पूरे मामले में आप सांसद चड्ढा ने दावा किया है कि हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल समेत कई अन्य सांसद भी इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बाकी बचे सांसदों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
आप के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से कम से कम सात सांसदों का समर्थन इस तरह के विलय के लिए जरूरी होता है। इन 10 में से तीन सांसद दिल्ली से और सात पंजाब से चुने गए हैं। जिन सात नामों की चर्चा हो रही है, उनमें स्वाति मालीवाल दिल्ली से अकेली सांसद हैं, जबकि अन्य छह पंजाब से संबंधित बताए जा रहे हैं।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यसभा सदस्यता को विशेष सुरक्षा प्राप्त होती है और किसी भी पार्टी द्वारा सीधे किसी सांसद को हटाया नहीं जा सकता। हालांकि, दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का प्रावधान लागू होता है, लेकिन दो-तिहाई संख्या के साथ विलय की स्थिति में राहत मिल सकती है।
इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि यह दावा कितनी मजबूती से टिकता है और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।