पीएम ने कहा देश को मेडल तभी मिलते हैं जब समाज में मजबूत स्पोर्ट्स कल्चर बनता है

नई दिल्ली : पदक जीतकर लौटे खिलाड़ियों के चेहरों पर गर्व था, बातचीत में संघर्ष की यादें थीं और माहौल में कभी भावुकता तो कभी हंसी-मजाक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान न केवल उनकी उपलब्धियों की सराहना की, बल्कि उनके संघर्ष, प्रशिक्षण, परिवार, सेना, खेलो इंडिया और भविष्य की तैयारियों पर भी विस्तार से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों की जीत सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों को खेलों की ओर प्रेरित करती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों से वह लगातार खिलाड़ियों से मिलते रहे हैं और भारतीय खिलाड़ियों ने जिस तरह देश को लगातार सफलता दिलाई है, उसका असर स्कूलों और युवाओं तक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि खेलों के लिए जागरूकता फैलाने से ज्यादा असर किसी खिलाड़ी के मेडल का होता है, क्योंकि जीत सीधे बच्चों और युवाओं को प्रेरित करती है।

बातचीत के दौरान कई खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों और संघर्षों को याद करते हुए भावुक हो गए। एक खिलाड़ी ने बताया कि पेरिस ओलंपिक में बेहद मामूली अंतर से मेडल चूकने के बाद चोट और पारिवारिक समस्याओं के बीच चार वर्षों का समय काफी कठिन रहा। जब वह इस बार पोडियम पर खड़ी हुई और राष्ट्रध्वज ऊपर उठा तथा राष्ट्रगान बजा तो भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकी। प्रधानमंत्री ने उसकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा बनेगी।

एक अन्य खिलाड़ी ने बताया कि गुरुपूर्णिमा के दिन आयोजित अपने इवेंट में जीत हासिल कर उसने पदक अपने गुरु को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने इसे गर्व का क्षण बताते हुए खिलाड़ी की भावनाओं की सराहना की।

खिलाड़ियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अब भारतीय खिलाड़ियों को प्रतिद्वंद्वी गंभीर चुनौती के रूप में देखते हैं। खासकर मुक्केबाजी में लगातार भारतीय खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन से विपक्षी खिलाड़ियों में भारत को लेकर दबाव दिखाई देता है। खिलाड़ियों ने कहा कि लगातार प्रतियोगिताएं मिलने, बेहतर प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं के कारण युवा खिलाड़ियों को काफी फायदा हुआ है।

कई खिलाड़ियों ने खेलो इंडिया और भारतीय खेल प्राधिकरण यानी SAI की योजनाओं का विशेष उल्लेख किया। एक खिलाड़ी ने बताया कि खेलो इंडिया से उसे शुरुआती दौर में मदद मिली और बेहतर प्रशिक्षण मिलने के बाद उसका प्रदर्शन लगातार सुधरा। एक अन्य खिलाड़ी ने SAI के प्रशिक्षण केंद्र को अपनी सफलता का बड़ा कारण बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा तभी बढ़ेगी जब सफल खिलाड़ी खुद युवा खिलाड़ियों के बीच जाकर उन्हें प्रेरित करेंगे।

बातचीत के दौरान सेना से जुड़े एक खिलाड़ी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पाकिस्तान के खिलाड़ी को हराने का अनुभव साझा किया। उसने बताया कि भारतीय सेना से जुड़े होने के कारण उसके लिए वह मुकाबला विशेष था और जीत के बाद उसने अपना पदक कारगिल के वीर जवानों को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस भावना ने उसकी जीत को और खास बना दिया।

एक खिलाड़ी ने पुराने अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेलों का किस्सा सुनाया, जिसमें पाकिस्तान के खिलाड़ी के खिलाफ मुकाबले के दौरान चोट लगने के बावजूद उसने जीत हासिल की थी। इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री और खिलाड़ियों के बीच कई बार हल्का-फुल्का माहौल भी बना और सभी हंसते नजर आए।

कुछ खिलाड़ियों ने वाराणसी, भोपाल और उज्जैन में प्रशिक्षण के अपने अनुभव भी साझा किए। प्रधानमंत्री ने उनसे स्टेडियम, प्रशिक्षण सुविधाओं और धार्मिक स्थलों की यात्राओं के बारे में पूछा। एक खिलाड़ी ने बताया कि वाराणसी में ट्रेनिंग के दौरान वह काशी विश्वनाथ मंदिर भी गई थी और भविष्य में वहीं रहकर अभ्यास करने की इच्छा रखती है।

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से कहा कि देश में खेलों की व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण स्पोर्ट्स कल्चर तैयार करना है। जब बच्चे खेलों को जीवन का हिस्सा मानेंगे और परिवार भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, तभी भारत बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय पदक जीत सकेगा।

मुलाकात के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय खिलाड़ी आगे भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे और आने वाले वर्षों में पदकों की संख्या लगातार बढ़ेगी। खिलाड़ियों के साथ सहज माहौल में हुई इस मुलाकात का समापन प्रधानमंत्री के संदेश के साथ हुआ कि खेल और खिलाड़ी दोनों देश की ऊर्जा और आत्मविश्वास को आगे बढ़ाते हैं।